श्रीनाथ मंदिर (सौ. फ्रीपिक)
Shrinathji Temple: राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित नाथद्वारा मंदिर सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं बल्कि भगवान की भक्ति, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण को श्रीनाथजी के रूप में पूजा जाता है। श्रीनाथजी के दरबार में आने वाले श्रद्धालु के लिए मंदिर प्रबंधन और कारोबारियों ने कई सुविधाएं जुटा रखी हैं। यहां पर श्रद्धालु अपने बजट के अनुसार सस्ते और महंगे होटल या धर्मशाला में स्टे कर सकते हैं।
भगवान श्रीनाथजी की नगरी में कई समाज की धर्मशाएं हैं। जहां श्रद्धालु 40 से 400 रुपए तक के खर्च में दिनभर ठहर सकते हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से यहां धर्मशालाएं भी बनाई गई हैं जिसकी बुकिंग श्रद्धालु ऑनलाइन भी कर सकते हैं। इस जगह यात्रा करने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है। इस समय यहां का मौसम सुहावना रहता है।
श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। यहां कान्हा का बाल रूप श्रीनाथ जी की मूर्ति के रूप में विराजमान है। माना जाता है कि श्रीनाथजी की मूर्ति गोवर्धन पर्वत से स्वयं प्रकट हुई थी। जानकारी के अनुसार 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल में हिंदू मंदिरों को नष्ट किया जा रहा था तब श्रीनाथजी की मूर्ति को वृंदावन से सुरक्षित ले जाया गया। रास्ते में रथ का पहिया नाथद्वारा के पास सिंगार गांव में फंस गया। जिससे यह संकेत मिला कि भगवान यहीं रहना चाहते हैं। जिसकी वजह से इस मंदिर का निर्माण इसी जगह करवाया गाया।
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नाथद्वारा में छप्पन भोग परंपरा है। माना जाता है कि गोवर्धन पूजा के समय श्रीकृष्ण ने लगातार सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को उठाया था। उस समय उनकी भूख मिटाने के लिए मां यशोदा ने 56 व्यंजन बनाए। इसी वजह से जन्माष्टमी के दिन यहां ये परंपरा निभाई जाती है और भव्य आयोजन किया जाता है।
पश्चिमी रेलवे की अहमदाबाद दिल्ली लाइन पर मारवाड़ जंक्शन है। मारवाड़ से एक लाइन मावली तक जाती है। मावली से 15 किमी से पहले नाथद्वारा है। जहां से 15 किमी दूरी पर कांकरोली रेलवे स्टेशन है। स्टेशन से नाथद्वारा के लिए कई बसें चलती हैं। उदयपुर से भी श्रीनाथजी के दर्शन करने पहुंचा जा सकता है।