कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा। इमेज-सोशल मीडिया
Rohit Bohra Viral Video : राजस्थान विधानसभा से ऐसी तस्वीर निकलकर सामने आई है, जिसने संसदीय गरिमा को तार-तार कर दिया है। धौलपुर के राजाखेड़ा से कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा का अमर्यादित और भद्दा इशारा सदन की लाइव कार्यवाही के दौरान कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसने राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
यह शर्मनाक वाकया उस समय हुआ, जब सदन में शून्य काल की कार्यवाही चल रही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक हरिमोहन शर्मा सदन में बात रख रहे थे और कैमरे का फोकस विपक्षी दीर्घा की ओर था। इसी दौरान विधायक रोहित बोहरा अपनी सीट पर बैठे-बैठे ऐसा आपत्तिजनक इशारा कर बैठे, जिसे शोभनीय नहीं कहा जा सकता। शायद विधायक जी यह भूल गए कि लोकतंत्र के इस मंदिर की हर हलचल जनता की नजरों में है और इसका सीधा प्रसारण लाखों लोग देख रहे हैं।
जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। राजस्थान और उत्तर प्रदेश बीजेपी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस वीडियो को साझा करते हुए इसे कांग्रेस की संस्कृति करार दिया है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और कैबिनेट मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को आदर्श मानती है, लेकिन ऐसे कृत्यों से पूरे सदन की साख गिरती है। सत्ता पक्ष अब रोहित बोहरा के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ा है।
राजस्थान विधानसभा में सरकारी कार्यक्रमों पर चर्चा हो रही थी, लेकिन कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा का ध्यान अश्लील इशारे करने में था। कांग्रेस और उसके नेताओं को सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की कोई चिंता नहीं है या फिर उनके लिए ऐसे अश्लील इशारे सामान्य बात है। pic.twitter.com/6F5aPYMAwd — Madan Rathore (@madanrrathore) February 12, 2026
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इस विवाद ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं में इस तरह की अमर्यादित सोच घर कर गई है। यह घटना उस समय आई है, जब पहले ही कांग्रेस के कुछ नेताओं के पुराने बयानों को लेकर विवाद होते रहे हैं। हालांकि, रोहित बोहरा का अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। मगर, उनके इस एक इशारे ने राजस्थान की राजनीति में मर्यादा बनाम बदजुबानी की नई बहस छेड़ दी है। सदन के अंदर हुए इस आचरण ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी और पद की गरिमा को पूरी तरह भूल चुके हैं।