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भारत का वो गांव जिसे कहते हैं ‘भगवान का अपना बगीचा’, अब तक यहां नहीं गए तो कहां गए?
कामकाज के चक्कर में शहर से ऊब गए हैं। भीड़-भाड़ में मन नहीं लग रहा तो चलिए आज हम आपको गांव की ओर ले चलते हैं। जी हां भारत का एक ऐसा गांव, जो साफ है, सुंदर है, सर्वोत्तम है और मनोहर है। कहते हैं असली भारत गांवों में में बसता है। ऊपर से गांव साफ-सुथरा और सुंदर हो तो फिर सोने पर सुहागा। कुछ ऐसा ही है वो गांव जहां हम आपको ले चलने वाले हैं।
- Written By: अभिषेक सिंह

मावल्यान्नॉंग, मेघालय (सोर्स-सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क : कामकाज के चक्कर में शहर से ऊब गए हैं। भीड़-भाड़ में मन नहीं लग रहा तो चलिए आज हम आपको गांव की ओर ले चलते हैं। जी हां भारत का एक ऐसा गांव, जो साफ है, सुंदर है, सर्वोत्तम है और मनोहर है। कहते हैं असली भारत गांवों में में बसता है। ऊपर से गांव साफ-सुथरा और सुंदर हो तो फिर सोने पर सुहागा। कुछ ऐसा ही है वो गांव जहां हम आपको ले चलने वाले हैं।
भारत गांवों का देश है। चलिए, गांव घुमने, हम ले चलते हैं आपको एशिया का सबसे सुन्दर और स्वच्छ गांव की और। एक तरफ जहां सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गांव, कस्बे और शहरों की हालत बदतर है वहीं, दूसरी तरफ एशिया का सबसे साफ़ सुथरा गांव भी भारत में है। इस गांव को ‘भगवान का अपना बगीचा’ के नाम से भी जाना जाता है। सफाई के साथ शिक्षा के मामले में भी यह गांव अवल्ल है। यहां की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। इतना ही नहीं, इस गांव में ज्यादातर लोग सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करते हैं।
मावल्यान्नॉंग गांव
नॉर्थ ईस्ट में मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर खासी हिल्स खासी हिल्स जिले का यह गांव है। वर्ष 2014 की गणना के मुताबिक इस छोटे से गांव में 95 परिवार रहते हैं। सुपारी की खेती गांव वालों की आय का मुख्य स्रोत है। यहां लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करते हैं। पूरे गांव में हर जगह कचरा डालने के लिए ऐसे बांस के डस्टबिन लगाए गए हैं। जिससे गांव साफ और सुंदर बना रहे।
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टूरिस्ट्स के लिए कई अमेंजिग स्पॉट
मावल्यान्नॉंग में पेड़ की जड़ों से बना पुल (सोर्स-सोशल मीडिया)
इस गांव में टूरिस्ट्स के लिए कई अमेंजिग स्पॉट हैं, जैसे वाटरफॉल, लिविंग रूट ब्रिज (पेड़ों की जड़ों से बने ब्रिज) और बैलेंसिंग रॉक्स जैसी चीजें मौजूद हैं। इसके अलावा जो एक और बहुत फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन है वो है 80 फ़ीट ऊंची मचान पर बैठ कर शिलांग की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारना। आप मावल्यान्नॉंग गांव घूमने का आनंद ले सकते पर आप यह ध्यान रखे की आप के द्वारा वहां की सुंदरता किसी तरह खराब न हो।
यह भी पढ़ें:– लैंडस्लाइड नहीं ख़ूबसूरती के लिए फेमस है वायनाड, जन्नत से कम नहीं हैं ये जगहें!
पेड़ों की जड़ों से बने प्राकर्तिक पूल जो समय के साथ कमजोर नहीं बल्कि मजबूत होते जाते हैं। इस तरह के ब्रिज आपको केवल मेघालय में ही मिलते हैं। यकीन मानिए इन पुलों को अपनी आखों से निहारना किसी आश्चर्श से कम नहीं है। क्या इतनी खुबसूरती गांवों में भी हो सकती है। गाँव में कई जगह आने वाले प्रयटकों की जलपान सुविधा के लिए ठेठ ग्रामीण परिवेश की टी स्टाल बने हुए हैं जहां आप गरमा-गरम चाय का आनंद ले सकते है इसके अलावा एक रेस्टोरेंट भी है जहाँ आप भोजन कर सकते है।
कैसे पहुंचे
मावल्यान्नॉंग गांव मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 90 किलोमीटर और चेरापूंजी से करीब 92 किलोमीटर दूर स्थित है। दोनों ही जगहों से सड़क मार्ग के जरिए आप यहां पहुंच सकते हैं। आप चाहे तो शिलांग तक देश के किसी भी हिस्से से हवाईजहाज के द्वारा भी पहुंच सकते है। लेकिन यहां जाते वक़्त एक बात ध्यान रखे की अपने साथ पोस्ट पेड़ मोबाइल ले के जाए क्योंकि अधिकतर नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में प्रीपेड मोबाइल बंद है।
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