हिमाचल प्रदेश का यह अनोखा मंदिर, जंजीरों से बंधा कलश पूरी करता है मनोकामनाएं!
हिमाचल प्रदेश का यह अनोखा मंदिर शिमला से करीब 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिसका नाम हाटेश्वरी माता मंदिर है। यह हिमाचल के पब्बर नदी के किनारे पर बसे गांव में मौजूद है।
- Written By: प्रीति शर्मा
हाटेश्वरी माता मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
शिमला: हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती और प्राकृतिक नजारे देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस जगह की सुंदरता, वादियां, पहाड़ और अद्भुत मौसम लुत्फ लेने के लिए लोग यहां आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां पर कलश को जंजीरों से बांधकर रखा जाता है। इस मंदिर के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। इस मंदिर में माता के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। इस मंदिर के चमत्कार सुनकर आप हैरान रह जाएंगे।
महाभारत काल से जुड़ा इतिहास
हिमाचल प्रदेश का यह अनोखा मंदिर शिमला से करीब 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जिसका नाम हाटेश्वरी माता मंदिर है। यह हिमाचल के पब्बर नदी के किनारे पर बसे गांव में मौजूद है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर में पांच मठ बने हुए हैं जिनमें शिव की प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। कहा जाता है कि ये मठ पांडवों द्वारा बनवाया गए थे। प्रचलित कहानियों के अनुसार यहां पर बैठकर पांडव माता रानी की पूजा करते थे।
जंजीरों से क्यों बांधा है कलश
शिमला के इस मंदिर में आपको एक बड़ा सा तांबे का घड़ा दिखाई देगा जो कि काफी पुराना है। इस कलश या घड़े को जंजीरों से बांधकर रखा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह जंजीरें माता रानी के पैरों के नीचे दबी हुई हैं। जिससे घड़ा भाग नहीं सकता है। क्योंकि जब पब्बर नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यह घड़ा भागने लगता है। जिसकी वजह से इसे बांधकर रखा गया है।
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हाटेश्वरी माता की मूर्ति
मंदिर के गर्भगृह में हाटेश्वरी माती की प्राचीन मूर्ति रखी हुई है जो महिषासुर का वध कर रही है। माना जाता है कि यह 7वीं शताब्दी की है। वहीं गर्भगृह के पास परशुराम का एक तांबे का कलश रखा हुआ है। खास अवसर या त्यौहारों पर इस कलश में ब्राह्मणों को भोजन बनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार जो लोग पूरी श्रद्धा से माता हाटेश्वरी और कलश के दर्शन करते हैं उनकी हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
