दक्षिण में मौजूद इन शक्तिपीठ के एक बार जरूर करें दर्शन, बनी रहेगी देवी मां की कृपा
लोग देशभर से शक्तिपीठों के दर्शन करने के लिए जाते हैं।नवरात्रि का पर्व चल रहा है, ऐसे में माता के शक्तिपीठों के दर्शन भर से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
- Written By: प्रीति शर्मा
चामुंडेश्वरी देवी मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता सती को उनके पिता द्वारा यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया तो वह अपने और भगवान शिव के इस अपमान को बर्दाश नहीं कर पाईं। इस अपमान से वह इतनी नाराज हो गई कि खुद को अग्नि में समर्पित कर दिया। इस बात का पता जब भगवान शिव को चला, तो वह क्रोध में आ गए और तांड़व करने लगे। इस घटना को देखकर सभी देवताओं और असुरों में भय पैदा हो गया। कहा जाता है कि इसके बाद भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से कई हिस्सों में बांटा और वह जिन जगहों पर गिरे उस जगह शक्तिपीठ का निर्माण हुआ। तब से आज तक इन जगहों को पूजनीय माना जाता है। लोग देशभर से शक्तिपीठों के दर्शन करने के लिए जाते हैं।
नवरात्रि का पर्व चल रहा है, ऐसे में माता के शक्तिपीठों के दर्शन भर से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। अगर आप भी शक्तिपीठों को मानते हैं, तो दक्षिण भारत की इन जगहों पर माता के दर्शन करने जा सकते हैं।
चामुंडेश्वरी देवी मंदिर
कर्नाटक राज्य में स्थित मैसूर शहर से करीब 13 किलोमीटर की दूर पर चामुंडेश्वरी देवी मंदिर है। माना जाता है कि यह मंदिर करीब एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। यह मंदिर मां दुर्गा के चामुंडा रूप को समर्पित है, जो कि चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर वाली जगह पर माता चामुंडा ने महिषासुर का वध किया था। इस वजह से इसे महाशक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
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चामुंडेश्वरी देवी मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)
मान्यताओं के अनुसार जब महिषासुर ने ब्रह्माजी की तपस्या कर वरदान हासिल किया तो वह देवताओं पर अत्याचार करने लगे। बह्माजी ने महिषासुर को वरदान दिया था कि उसका वध किसी स्त्री से ही होगा। महिषासुर के अत्याचारों से परेशान मां दुर्गा ने चामुंडा का रूप धारण किया और महिषासुर का वध कर दिया। इस शक्तिपीठ के दर्शन करने परिवार के साथ जरूर जाएं।
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आलमपुर जोगुलाम्बा मंदिर
तेलंगाना के जोगलबा गडवाल जिले में स्थित आलमपुर बहुत ही धार्मिक महत्व रखता है। इस शहर में तुंगभद्रा और कृष्णा नदी का संगम होता है इस वजह से यह ज्यादा खास माना जाता है। आलमपुर में जोगुलाम्बा मंदिर र को 18 महाशक्तिपीठों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि इस जगह माता सती के दांतों के ऊपर वाली पंक्ति गिरी थी। यहां पर माता को योगाम्बा देवी के नाम से पूजा जाता है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आप नवरात्रि पर प्लान बना सकते हैं।
श्री भ्रमराम्बा शक्तिपीठ मंदिर
आंध्र प्रदेश के कुर्नुल जिले में स्थित मां भ्रमराम्बा शक्तिपीठ मौजूद है। इसे माता शक्ति और भगवान शिव के पवित्र धामों में से एक माना जाता है। श्रीसैलम पर देवी भ्रमराम्बा शक्तिपीठ और मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग दोनों स्थित है। इस मंदिर परिसर में माता सती की ग्रीवा का पतन हुआ था। यहां पर भगवान शिव को शम्बरानंद भैरव के रूप में स्थापित किया गया है, जिसे मल्लिकार्जुन स्वामी भी कहा जाता है।
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