इतिहास की गलियारों में ले जाएगी ये खास जगहें (सोर्स: सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: दिसंबर में ठंडी की छुट्टियों के दौरान कहीं घूमने जाने का मन तो सबका होता ही होगा। पर समझ नहीं आता कि जाएं तो जाएं कहां। ऐसे में यदि आपको प्राचीन संस्कृति और भारत की ऐतिहासिक धरोहरें देखने में रुचि हो तो आप इन कुछ जगहों पर विजिट कर सकते हैं।
बच्चों को भारतीय संस्कृति और भव्य इतिहास का लाइव उदाहरण दिखाने के लिए ये जगहें एकदम परफेक्ट साबित हो सकती हैं। आइए जानते हैं इन टूरिस्ट प्लेसेस के बारे में…
आगरा का ताज महल दुनिया के सात अजूबों में से एक है। ताज महल भारत के प्राचीन मुगल स्थापत्य शैली का अनोखा उदाहरण है। ताज महल को अमर प्यार की निशानी भी कहा जाता है। इसका निर्माण 17वीं सदी में राजा शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था। इस महल के चारों दरवाजों पर सुंदर कलाकारी की गई है। यहां मौजूद तालाब और फाउंटेन महल की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करते हैं।
ताज महल (सोर्स: सोशल मीडिया)
कर्नाटक में मौजूद हम्पी भारत के प्राचीन संस्कृति की एक अनोखी दास्तान बयां करता है। हम्पी तुंगभद्रा नदी के तट पर बसा एक शहर है। हम्पी को यूनेस्को के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है। हम्पी में घाटियों और टीलों के बीच 500 से भी अधिक स्मारक चिह्न देखने को मिलते हैं। इनमें मंदिर, महल, तहख़ाने, तालाब, पुराने बाज़ार, शाही मंडप, गढ़, चबूतरे, राजकोष जैसी असंख्य इमारतें हैं।
हम्पी, कर्नाटक (सोर्स: सोशल मीडिया)
कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओड़िशा के पुरी जिले में समुद्र तट पर पुरी शहर के पास बना है। सूर्य भगवान को समर्पित यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। इसे यूनेस्को द्वारा 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। इस मंदिर की रचना सूर्य देव के रथ के आकार में की गई है, जिसमें सूर्य देव को विराजमान दिखाया गया है। 24 जटिल नक्काशीदार पहियों पर खड़ा यह मंदिर अपनी सुंदरता से किसी को भी आश्चर्यचकित कर सकता है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां की रोशनी की स्थिति को देखकर समय का पता लगाया जा सकता है।
सूर्य मंदिर (सोर्स: सोशल मीडिया)
गुजरात के पाटन राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी है। 22 जून 2014 को इसे यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में सम्मिलित किया गया था। ऐतिहासिक कहानियों में कहा गया है कि साल 1063 में रानी उदयामति ने अपने पति, सोलंकी शासन के राजा भीमदेव प्रथम की याद में बनवाया था। वाव के स्तंभ सोलंकी वंश के इतिहास और उस समय की अनोखी वास्तुकला का प्रतीक है। सात मंजिला यह वाव मारू-गुर्जर शैली का साक्ष्य है। यहां की पत्थर की नक्काशी, सीढ़ियों का डिज़ाइन, भगवान शिव को समर्पित मूर्तियां एक भव्य और अनोखा अनुभव देती हैं।
रानी की वाव (सोर्स: सोशल मीडिया)
ग्वालियर दुर्ग गोपाचल पर्वत पर स्थित है। यह एक आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम के रूप में पर्यटकों के लिए खुला है। एक ऊंचे पठार पर बने इस किले तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं। एक ग्वालियर गेट के नाम से जाना जाता है, तो दूसरा ऊरुवाई गेट के नाम से प्रसिद्ध है। किले की शानदार बाहरी दीवारें दो मील लंबी और 35 फुट ऊंची हैं। राजपूत राजा मान सिंह तोमर द्वारा इस किले का निर्माण करवाया गया था। किले के भीतर मध्यकालीन वास्तुकला के कई चमत्कार हैं।
ग्वालियर दुर्ग (सोर्स: सोशल मीडिया)
इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए ये जगहें काफी खास साबित हो सकती हैं। साथ ही ये जगहें नई पीढ़ी को भारत के भव्य इतिहास और विरासत से जोड़ने का काम करती हैं। अगर आप भी अपने बच्चों को भारत की जड़ों से जोड़कर उन्हें भारतीय संस्कृति की जादुगारी दिखाना चाहते हैं, तो इन जगहों पर विजिट कर सकते हैं।