ट्रैकिंग और भक्ति का अनोखा संगम! 700 फीट ऊंची पहाड़ी पर छिपा है यह रहस्यमयी मंदिर
Alopi Shankar Mahadev Temple: अगर आप रोमांच और आध्यात्मिक शांति दोनों का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह 700 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित रहस्यमयी मंदिर एक बेहतरीन विकल्प है।
- Written By: प्रीति शर्मा
आलोपी शंकर मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
Madhya Pradesh Mysterious Temple: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित कैलारस नगर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। यहाँ 700 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित अलोपीशंकर महादेव का प्राचीन मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि अपने भीतर एक सहस्राब्दी पुराना रहस्य भी समेटे हुए है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ एक ही जलहरी के भीतर दो पिण्डियां (शिवलिंग) विराजमान हैं जो देश के गिने-चुने मंदिरों में ही देखने को मिलता है।
1000 साल पुराना है इतिहास
मान्यता है कि यह मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। किवदंतियों के अनुसार यहां सिद्ध बाबा बौद्ध गिरी का स्थान हुआ करता था। उनके अदृश्य होने (अलोप होने) के बाद उसी स्थान से स्वतः ही दो शिवलिंग प्रकट हुए। क्योंकि बाबा अलोप हुए थे इसलिए इस स्थान का नाम अलोपीशंकर महादेव पड़ा। यहाँ एक ही जलहरी में दो पिंडियों का होना शिव और शक्ति या गुरु-शिष्य के संगम का प्रतीक माना जाता है।
लाखा बंजारे की वो कहानी
मंदिर से जुड़ी एक प्रसिद्ध लोककथा लाखा बंजारे की है। कहा जाता है कि लाखा बंजारा शक्कर की बोरियां लेकर जा रहा था तभी सिद्ध बाबा ने उससे पूछा कि बोरियों में क्या है? अहंकार वश लाखा ने झूठ बोल दिया कि इनमें नमक है। जब वह बाजार पहुंचा तो चमत्कारी रूप से शक्कर नमक में बदल चुकी थी। अपनी गलती का अहसास होने पर जब वह वापस पहाड़ी पर पहुंचा तो बाबा अलोप हो चुके थे और वहां शिवलिंग प्रकट हो गए थे।
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560 सीढ़ियों का सफर और अखंड आस्था
मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को 560 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। सावन के महीने में यहाँ का नजारा दिव्य होता है। न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी हजारों कांवड़िए और श्रद्धालु यहां जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पिछले 10 वर्षों से यहाँ अखंड रामायण का पाठ और अखंड ज्योति प्रज्वलित है जो इस स्थान की ऊर्जा को और बढ़ाती है।
कैसे पहुंचे अलोपी शंकर महादेव
बस: मुरैना और ग्वालियर से हर 5 मिनट में कैलारस के लिए बसें उपलब्ध हैं।
रेल: ग्वालियर से श्योपुर तक ब्रॉडगेज लाइन का काम चल रहा है जिससे भविष्य में रेल यात्रा और भी सुगम हो जाएगी।
निजी साधन: हाईवे पर स्थित होने के कारण भक्त अपने निजी वाहनों से भी आसानी से यहां पहुंच सकते हैं।
चाहे वह पहाड़ी से दिखने वाला खूबसूरत नजारा हो या एक जलहरी में दो शिवलिंगों का अनूठा दर्शन अलोपीशंकर महादेव की यात्रा हर श्रद्धालु के लिए यादगार साबित होती है।
