मुलताई में 50 मुस्लिम किन्नरों की ‘घर वापसी’; ताप्ती के जल से शुद्धिकरण, लगाए कई गंभीर आरोप
Madhya Pradesh में 50 किन्नरों ने इस्लाम छोड़कर फिर से सनातन धर्म अपना लिया। उन्होंने धर्मांतरण के लिए 'ब्रेनवाश' करने और हिंदू समाज से मिलने वाली 'बधाई' के पैसे का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Multai Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में माँ ताप्ती के पावन उद्गम स्थल पर एक बड़ा धार्मिक घटनाक्रम सामने आया है। किन्नर अखाड़ा के तत्वाधान में आयोजित एक कार्यक्रम में लगभग 50 मुस्लिम किन्नरों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म में वापसी की है। इस दौरान उन्होंने पूर्व में हुए अपने धर्मांतरण को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
बैतूल जिले के मुलताई में स्थित आशीर्वाद लॉन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों- जैसे अमरावती, परतवाड़ा, छिंदवाड़ा और नागपुर- से आए किन्नर समुदाय के लोग शामिल हुए। इन सभी किन्नरों का माँ ताप्ती के सातों कुंडों के जल से अभिषेक कर विधिवत हिंदू रीति-रिवाज से पूजन किया गया और उनकी ‘घर वापसी’ सुनिश्चित की गई। किन्नर अखाड़ा के संतों के अनुसार, ये लोग काफी समय से इस्लाम में ‘दूषित’ हो चुके थे और अब स्वेच्छा से अपने मूल धर्म की ओर लौटे हैं।
धमकी, ब्रेनवाश और आत्महत्या का खौफनाक दावा
कार्यक्रम के दौरान अमरावती से आई अम्रपाली ने धर्मांतरण के पीछे के काले सच का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू बच्चों का ‘ब्रेनवाश’ किया जाता है और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। अम्रपाली ने यह भी बताया कि इनकार करने पर परिवारों को धमकियां दी जाती हैं और भाई-बहनों को उठाने या जान से मारने का डर दिखाया जाता है। उन्होंने सागर के एक हिंदू बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों के भारी दबाव (प्रेशर) के कारण उस बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
Multai Betul News: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में माँ ताप्ती के पावन उद्गम स्थल पर एक बड़ा धार्मिक घटनाक्रम सामने आया है। किन्नर अखाड़ा के तत्वाधान में आयोजित एक कार्यक्रम में लगभग 50 मुस्लिम किन्नरों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म में वापसी की है। इस दौरान उन्होंने पूर्व में हुए अपने धर्मांतरण को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
बैतूल जिले के मुलताई में स्थित आशीर्वाद लॉन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों- जैसे अमरावती, परतवाड़ा, छिंदवाड़ा और नागपुर- से आए किन्नर समुदाय के लोग शामिल हुए। इन सभी किन्नरों का माँ ताप्ती के सातों कुंडों के जल से अभिषेक कर विधिवत हिंदू रीति-रिवाज से पूजन किया गया और उनकी ‘घर वापसी’ सुनिश्चित की गई। किन्नर अखाड़ा के संतों के अनुसार, ये लोग काफी समय से इस्लाम में ‘दूषित’ हो चुके थे और अब स्वेच्छा से अपने मूल धर्म की ओर लौटे हैं।
धमकी, ब्रेनवाश और आत्महत्या का खौफनाक दावा
कार्यक्रम के दौरान अमरावती से आई अम्रपाली ने धर्मांतरण के पीछे के काले सच का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू बच्चों का ‘ब्रेनवाश’ किया जाता है और उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जाता है। अम्रपाली ने यह भी बताया कि इनकार करने पर परिवारों को धमकियां दी जाती हैं और भाई-बहनों को उठाने या जान से मारने का डर दिखाया जाता है। उन्होंने सागर के एक हिंदू बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा कि इन लोगों के भारी दबाव (प्रेशर) के कारण उस बच्चे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
