कंपन से बनेगी बिजली, वैज्ञानिकों ने खोजी नई क्रांतिकारी तकनीक
Energy from vibration: वैज्ञानिकों ने बिजली बनाने का एक नया तरीका खोज निकाला है, जो आने वाले समय की तस्वीर बन सकता है और इस तरीके से बड़ी आसानी से बिजली को पैदा किया जा सकता है।
- Written By: सिमरन सिंह
Scientists की नई तकनीक। (सौ. AI)
Electricity from Vibration: सड़क पर दौड़ती गाड़ियां, पटरी पर चलती ट्रेनें या पैदल चलते इंसान इन सबकी वजह से धरती पर लगातार कंपन उत्पन्न होता है। अब तक यह ऊर्जा बेकार चली जाती थी, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे बिजली में बदलने की अनोखी तकनीक विकसित की है। इस खोज से ऊर्जा उत्पादन का एक नया रास्ता खुल सकता है।
ऊर्जा का छिपा खजाना
मेट्रो की आवाजाही से धरती थरथराती है, पुलों पर गाड़ियों की रफ्तार कंपन पैदा करती है और इंसानों के कदमों से भी सूक्ष्म ऊर्जा निकलती है। नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस कंपन को बिजली में बदलने के लिए ‘Piezoelectric Energy Harvester’ तकनीक में नया सुधार किया है। यह उपकरण रोज़मर्रा के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
परंपरागत तकनीक की सीमाएं
अब तक बिजली उत्पादन के लिए सबसे आम पद्धति ‘Diving board design’ रही है। इसमें पतली बीम झुककर दबाव डालती है और बिजली पैदा होती है। समस्या यह है कि यह तकनीक केवल सीमित कंपन आवृत्तियों पर ही काम करती है, जैसे रेडियो केवल एक स्टेशन पकड़ पाए। साथ ही, इसमें अधिक दबाव बीम के एक छोर पर पड़ता है, जिससे पूरी सामग्री का सही उपयोग नहीं हो पाता।
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स्ट्रेच-मोड डिजाइन: नई दिशा
वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान ‘Stretch-mode design’ से किया है। इसमें पतली PVDF फिल्म को ढोलक की चमड़ी की तरह चारों ओर से तान दिया गया है, जिससे पूरी सतह बिजली बनाने में सक्रिय हो जाती है। इसका असली कमाल है ‘Sliding Mass’ एक छोटा भार जो कंपन के अनुसार खुद-ब-खुद खिसकता है।
- ज्यादा कंपन पर यह भार बाहर की ओर खिसककर आवृत्ति घटाता है।
- कम कंपन पर गुरुत्वाकर्षण इसे वापस खींच लेता है और आवृत्ति बढ़ जाती है।
सरल शब्दों में कहें तो यह उपकरण खुद-ब-खुद ट्यून हो जाता है।
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शानदार नतीजे
प्रयोगों में यह तकनीक पुराने डिजाइनों से कहीं बेहतर साबित हुई।
- यह लगभग दोगुनी बिजली पैदा कर सकती है।
- दोगुनी आवृत्तियों पर काम कर सकती है।
- अभी के परीक्षणों में यह उपकरण लगभग 29 वोल्ट तक बिजली देने में सक्षम है।
सबसे खास बात यह है कि यह बिना किसी बाहरी मदद के कम ऊर्जा से उच्च ऊर्जा की स्थिति में आसानी से शिफ्ट हो सकता है।
संभावनाओं की नई दुनिया
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सफल होने पर यह तकनीक हमारी जिंदगी बदल सकती है। वायरलेस सेंसर, मोबाइल डिवाइस, और मेडिकल इम्प्लांट्स बिना बैटरी के लंबे समय तक काम कर पाएंगे। भविष्य में यह तकनीक बैटरी पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भर उपकरणों की नई दुनिया की शुरुआत कर सकती है।
