AI की वजह से मचा बवाल, अमेरिका में डेटा सेंटर्स के खिलाफ फूटा गुस्सा, चीन पर लगे बड़े आरोप

AI Data Center Protest: AI आज के समय में दुनिया भर के अंदर तकनीकी क्रांति की तस्वीर बन चुकी है। लेकिन अब अमेरिका में इसी AI को लेकर लोगों के बीच गुस्सा देखने को मिल रहा है, जिसमें उनकी मांगे अलग है।
Outrage erupts US against data centers AI Data Center Protest
AI Data Center Protest (Source. Social Media/X)
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America AI Data Center Protest: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में दुनिया भर के अंदर तकनीकी क्रांति की तस्वीर बन चुकी है। जिसका इस्तेमाल कंपनी से लेकर सरकार तक अपने काम को तेज और आसान बनाने के लिए कर रही है। लेकिन अमेरिका में AI को लेकर लोगों के बीच गुस्सा देखने को मिल रहा है, जिसमें उसके शक्ति देने वाले डेटा सेंटर्स एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि बढ़ते बिजली बिल, पानी की भारी खपत और लगातार होने वाले शोर से परेशान होकर लोग इन डेटा सेंटर्स के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इसके साथ ही कई टेक कंपनियां का यह भी दावा हैं कि इस विरोध को चीन और उससे जुड़े नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए और तेज करने की कोशिश कर रहे है।

क्या होते हैं डेटा सेंटर्स और क्यों बढ़ रही है इनकी संख्या?

डेटा सेंटर के बारे में बताए तो यह ऐसे बड़ा तकनीकी ढांचा होता हैं जिसमें AI मॉडल, क्लाउड सेवाएं और इंटरनेट से जुड़ा भारी डेटा प्रोसेस और स्टोर किया जाता है। वहीं दुनिया में बढ़ती AI की मांग के कारण अमेरिका में तेजी से नए डेटा सेंटर्स को तैयार किया जा रहा हैं। लेकिन वहां के स्थानीय समुदायों का कहना है कि इन परियोजनाओं का असर सीधे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

टेक कंपनियों का दावा विदेशी ताकतें भड़का रही हैं विरोध

वहीं इस विरोध को देखते हुए टेक इंडस्ट्री संगठन NetChoice के सीईओ स्टीव डेलबिएनको का कहना है कि अमेरिकी नागरिकों के मन में पहले से ही नौकरियों और महंगाई को लेकर AI का डर बना हुआ है। जिसमें उनका साफ तौर पर कहना है कि विदेशी ताकतें इसी डर का फायदा उठाकर डेटा सेंटर्स के खिलाफ झूठी जानकारियां सोशल मीडिया पर फैला रही हैं। वहीं जांच में कई ऐसे सोशल मीडिया सामने आए हैं जो खुद को अमेरिकी बताते हैं लेकिन कथित रूप से बांग्लादेश, पोलैंड, दक्षिण एशिया और अफ्रीका से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि डेटा सेंटर्स के कारण स्थानीय इलाकों में पानी और बिजली की समस्याएं पैदा हो रही है।

क्या सचमुच चीन की साजिश या जनता की असली नाराजगी?

वहीं अब सामने आए बयानों को लेकर दूसरी ओर पर्यावरण संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि टेक कंपनियां अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए विदेशी साजिश का मुद्दा उठा रही हैं। जिसमें उन्होंने लोगों के गुस्से को पूरी तरह वास्तविक बताया है। जिसका सोबत देते हुए हाल ही में आए एक गैलप पोल को देखा जा रहा है, जिसके मुताबिक 71% अमेरिकी नागरिक नहीं चाहते कि उनके इलाके में नए डेटा सेंटर्स बनाए जाएं। जिससे यह तो साफ होता है कि स्थानीय स्तर पर इन परियोजनाओं को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई है।

बिजली, पानी और शोर बना सबसे बड़ा मुद्दा

लोगों के अंदर गुस्से का कारण कई तरह से पैदा हुआ है जिसमें पहला है कि डेटा सेंटर्स को लगातार ठंडा रखने के लिए लाखों गैलन पानी और भारी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है और बिजली बिल भी प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कूलिंग सिस्टम से निकलने वाला शोर आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। जिससे लोग ना खुश है।

ऐसे में यह भी देखा जै रहा है कि अब यह मुदा राजनीतिक मोड़ भी ले चुका है। जिसके अदंर AI समर्थक समूह अमेरिकी संसद से कथित विदेशी हस्तक्षेप की जांच की मांग कर रहे हैं और दूसरी ओर पर्यावरण संगठन कंपनियों पर जवाबदेही तय करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह विवाद अमेरिका की AI नीति और तकनीकी विकास की दिशा को भी पूरी तरह बदल सकता है।

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