Google ने रंगीन Doodle के जरिए मनाया 2025 का नौरूज, जानें इसकी खास परंपराएं

फारसी भाषा में "नौरूज" का अर्थ "नया दिन" होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस दिन रात और दिन की अवधि लगभग समान होती है, जो इसे खास बनाती है।
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Google Doddle में क्या कुछ है नया। (सौ. Google)
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नवभारत टेक डेस्क: गूगल ने फारसी नववर्ष नौरूज 2025 को एक रंगीन और जीवंत डूडल के माध्यम से मनाया है। इस खास डूडल को अतिथि कलाकार पेंदार यूसुफी ने डिजाइन किया है। नौरूज को फारसी कैलेंडर में नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है और यह पिछले 3,000 वर्षों से मनाया जा रहा है।

फारसी भाषा में "नौरूज" का अर्थ "नया दिन" होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस दिन रात और दिन की अवधि लगभग समान होती है, जो इसे खास बनाती है।

हफ्त-सिन टेबल: नौरूज की परंपराओं का केंद्र

गूगल ने अपने विवरण में बताया कि नौरूज की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक ‘हफ्त-सिन टेबल’ है। यह सात प्रतीकात्मक वस्तुओं का सुंदर प्रदर्शन होता है, जिनके नाम फारसी भाषा के अक्षर ‘सिन’ से शुरू होते हैं। हफ्त-सिन टेबल में रखी जाने वाली चीजें और उनके अर्थ:

  • सेब (सीब) – सुंदरता का प्रतीक
  • लहसुन (सीर) – अच्छे स्वास्थ्य के लिए
  • जैतून (सेन्जेद) – प्रेम का प्रतीक
  • बेरी (सोमाक) – सूर्योदय और नई शुरुआत के लिए
  • सिरका (सेरके) – धैर्य और ज्ञान का प्रतीक
  • अंकुर (सब्ज़े) – पुनर्जन्म और ताजगी का संकेत
  • गेहूं की खीर (समानू) – शक्ति और समृद्धि का प्रतीक

गूगल डूडल में दिखे नौरूज से जुड़े खास तत्व

गूगल के इस डूडल में नौरूज से जुड़े विभिन्न पारंपरिक तत्वों को दिखाया गया है, जिनमें –

  • खिलते हुए फूल – वसंत ऋतु की ताजगी दर्शाते हैं।
  • सेब – सौंदर्य और स्वास्थ्य का प्रतीक है।
  • पक्षी – स्वतंत्रता और नई शुरुआत को दर्शाते हैं।
  • खाना पकाना – समृद्धि और परंपराओं को बनाए रखने का प्रतीक है।
  • सफाई – नए साल की नई ऊर्जा को दर्शाती है।

नौरूज से जुड़ी खास परंपराएं

गूगल ने यह भी बताया कि नौरूज के दौरान विभिन्न रोचक गतिविधियां की जाती हैं, जैसे –

  • घर की सफाई – इसे "खाने तकनी" कहा जाता है, जिसका अर्थ है पुराने वर्ष की नकारात्मकता को दूर कर नई सकारात्मक ऊर्जा आमंत्रित करना।
  • अंडों को सजाना – यह जीवन और उर्वरता का प्रतीक है।
  • अलाव के ऊपर से कूदना – यह परंपरा पिछले वर्ष की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और नए साल में सकारात्मकता लाने के लिए की जाती है।

3,000 साल पुरानी परंपरा, ईरान से हुई थी शुरुआत

गूगल के ब्लॉग के अनुसार, नौरूज मनाने की परंपरा लगभग 3,000 साल पुरानी है। इसकी शुरुआत प्राचीन ईरान (तब फारस) में हुई थी। यह त्योहार वसंत विषुव के समय मनाया जाता था, ताकि खिलते हुए मौसम की शुरुआत को चिह्नित किया जा सके।

समय के साथ, सिल्क रोड के किनारे बसे कई देशों और जातीय समूहों ने इस परंपरा को अपनाना शुरू कर दिया। आज नौरूज ईरान, अफगानिस्तान, अजरबैजान, तुर्की, ताजिकिस्तान, भारत और पाकिस्तान सहित दुनिया के कई हिस्सों में मनाया जाता है।

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