Meta पर मंडराया इतिहास का सबसे बड़ा कानूनी संकट, बच्चों को सोशल मीडिया का आदी बनाने का है आरोप
Meta अब अपने सबसे बड़े कानूनी संकट में फंस गया है। अमेरिका के चार राज्यों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसे डिजाइन किया थी कि बच्चे और युवा ज्यादा समय वहां रह सकें।
- Written By: सिमरन सिंह
Meta Lawsuit (Source. Meta)
Meta Lawsuit: देखा जा रहा है कि दुनियाभर में फेसबुक और इंस्टाग्राम चलाने वाला Meta अब अपने सबसे बड़े कानूनी संकट में फंस गया है। बता दें कि अमेरिका के चार राज्यों ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसने जानबूझकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया थी कि बच्चे और युवा लंबे समय तक स्क्रीन से चिपके रहें। वहीं आरोप यह भी है कि कंपनी ने इन प्लेटफॉर्म्स के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर लोगों को गुमराह किया है।
इस मामले को लेकर रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त में कैलिफोर्निया की कोर्ट में ट्रायल के लिए जाएगा। इस दौरान कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी की सरकारें Meta के खिलाफ अपने सबूत पेश करेंगी। वहीं माना जा रहा है कि यह मामला सिर्फ Meta ही नहीं बल्कि पूरी सोशल मीडिया इंडस्ट्री के भविष्य पर असर डाल सकता है।
इतना बड़ा जुर्माना क्यों मांग रहे हैं राज्य?
कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के बारे में बताए तो इसमें चारों राज्यों ने अपने-अपने यूजर्स प्रोटेक्शन एक्ट के तहत प्रभावित बच्चों और युवाओं की संख्या के आधार पर भारी जुर्माने का आकलन किया है। लेकिन इसकी सटीक गणना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं Meta ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जिसके बाद से कंपनी का कहना है कि “इस मांग का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं है” इसके साथ ही Meta ने यह भी दलील दी है कि सोशल मीडिया एडिक्शन को अब तक आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं माना गया है और यूजर्स प्रोटेक्शन के इतिहास में इतने बड़े जुर्माने का कोई उदाहरण नहीं है।
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अब AI कंपनियां भी सवालों के घेरे में
देखा जा रहा है कि डिजिटल एडिक्शन की बहस अब सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गई है। यह अब इंसानों की तरह बातचीत करने वाले AI चैटबॉट्स भी अब रेगुलेटर्स की नजर में हैं। पिछले महीने फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमेयर ने OpenAI और उसके सीईओ सैम ऑल्टमैन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने ChatGPT के तेजी से विस्तार के दौरान सुरक्षा चिंताओं और युवाओं में बढ़ती निर्भरता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। लेकिन OpenAI ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि वह लगातार अपने सुरक्षा उपायों को बेहतर बना रही है।
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AI चैटबॉट्स से बढ़ रहा भावनात्मक जुड़ाव
हाल के महीनों में देखा गया है जिसमें कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जिनमें लोग AI चैटबॉट्स से भावनात्मक रूप से जुड़ते दिखाई दिए। जिसमें एक 66 वर्षीय महिला का मामला भी चर्चा में रहा जो बागवानी और टैक्स से जुड़ी मदद लेते-लेते ChatGPT से भावनात्मक लगाव महसूस करने लगी। वहीं कई यूजर्स अकेलेपन और मानसिक तनाव के दौरान AI को अपना भरोसेमंद साथी बता रहे हैं।
ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे AI और सोशल मीडिया तकनीक अधिक व्यक्तिगत और इंटरैक्टिव होती जाएगी बच्चों और युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियम और भी सख्त हो सकते हैं। ऐसे में Meta पर चल रहा यह मुकदमा आने वाले समय में पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
