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हिमाचल प्रदेश में ड्रोन की मदद से डाक की सेवा को 110 रूट तक बढ़ाया जाएगा।
ड्रोन की मदद से डाक की से पहले से 36 रूट पर दी जाती है।
इस सेवा में सिर्फ चिट्ठियां ही नहीं बल्कि पार्सल और डाक को भी पहुंचाया जाएगा।
India Post Drone Delivery: हिमाचल प्रदेश के दुर्गम गांवों में चिट्ठी या पार्सल पहुंचने का इंतजार अब कम हो सकता है। बता दें कि घुमावदार पहाड़ी सड़कों और कठिन रास्तों के कारण जिन जगहों तक पहुंचने में डाक कर्मचारियों को काफी समय लगता है वहां अब ड्रोन की मदद ली जा रही है। इंडिया पोस्ट ने राज्य में ड्रोन से डाक पहुंचाने की सुविधा को 110 रूट तक बढ़ाने की योजना बनाई है। इनमें से 36 रूट पर यह सेवा पहले से चल रही है। साथ ही इस पहल का मकसद दूर-दराज के इलाकों तक डाक और पार्सल पहुंचाने में लगने वाला समय कम करना और सेवा को अधिक भरोसेमंद बनाना है।
हिमाचल प्रदेश में कई गांव पहाड़ों के बीच बसे हुए हैं जहां सड़क से पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। ऐसे में एक डाकघर से दूसरे डाकघर तक चिट्ठियां और पार्सल पहुंचाने में काफी समय लग सकता है।
वहीं ड्रोन हवा के रास्ते सीधे डाक ले जा सकते हैं जिससे सड़क की दूरी और दुर्गम रास्तों पर निर्भरता कम हो सकती है। डाक विभाग के अधिकारियों इसको लेकर कहता है कि अभी के लिए 36 रूट पर इस सुविधा का इस्तेमाल हो रहा है और इसे 110 रूट तक बढ़ाने की तैयारी है। लेकिन सभी रूट पर सेवा शुरू होने की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
डाक विभाग की इस पहल की शुरुआत मंडी के मुख्य डाकघर से रेहरधार शाखा डाकघर तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाने के साथ हुई थी। इस दौरान ड्रोन का इस्तेमाल करके तिरंगा एक डाकघर से दूसरे डाकघर तक भेजा गया था। वहीं विश्व डाक दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल संजय सिंह ने ड्रोन डिलीवरी नेटवर्क को 110 रूट तक बढ़ाने की योजना की जानकारी दी। विभाग का जोर ऐसे इलाकों में डाक सेवाओं को बेहतर बनाने पर है जहां पारंपरिक परिवहन चुनौतीपूर्ण है।
इस सुविधा का इस्तेमाल सिर्फ चिट्ठियां ही नहीं बल्कि पार्सल और डाक सामग्री पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। इससे दूरस्थ शाखा डाकघरों तक डाक भेजने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में इसका फायदा मिलने की उम्मीद है जहां खराब सड़कें और लंबी दूरी नियमित डिलीवरी को प्रभावित करती हैं।
ड्रोन डिलीवरी से परिवहन का समय कम हो सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर पार्सल सीधे ग्राहक के घर तक ड्रोन से पहुंचेगा। डाकघर से गांव तक अंतिम डिलीवरी की प्रक्रिया अलग रह सकती है। मौसम, उड़ान की परिस्थितियों और रूट की उपलब्धता का भी असर पड़ेगा। सेवा का विस्तार होने के बाद ही पता चलेगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में डिलीवरी कितनी तेज होती है।