Jio-Airtel में छिड़ी नई जंग, 5G स्पेक्ट्रम पर बढ़ा विवाद, बदल सकता है भारत का इंटरनेट भविष्य
Jio Vs Airtel For 26Ghz Band Dispute: जियो और एयरटेल के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बता दें कि मामला 26GHz बैंड के 5G स्पेक्ट्रम से जुड़ा है जिसे लेकर दोनों कंपनियों की राय बिल्कुल अलग है।
- Written By: सिमरन सिंह
Jio Vs Airtel (Source. Navbharat Desk)
Jio Vs Airtel: देश की जानी मानी दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियों जियो और एयरटेल के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बता दें कि मामला 26GHz बैंड के 5G स्पेक्ट्रम से जुड़ा है जिसे लेकर दोनों कंपनियों की राय बिल्कुल अलग है। इसमें रिलायंस जियो का कहना है कि स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल WiFi आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए करना चाहिए। वहीं एयरटेल ने इसका कड़ा विरोध किया है। इस विवाद ने न सिर्फ टेलीकॉम इंडस्ट्री बल्कि सरकार के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है।
जानकारी के लिए बता दें कि साल 2022 में टेलीकॉम कंपनियों ने करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च कर 26GHz बैंड का स्पेक्ट्रम खरीदा था। अब सवाल यह है कि क्या इस हाई-फ्रीक्वेंसी बैंड का उपयोग पारंपरिक 5G सेवाओं के अलावा WiFi इंटरनेट के लिए भी किया जाना चाहिए या नहीं।
Jio का प्लान: सस्ता और तेज इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जियो ने पिछले साल दूरसंचार विभाग (DoT) को पत्र लिखकर 26GHz स्पेक्ट्रम का उपयोग घरों और कॉरपोरेट ग्राहकों को WiFi आधारित ब्रॉडबैंड सेवाएं देने के लिए मंजूरी मांगी थी। जिसको लेकर कंपनी का तर्क था कि इससे फाइबर केबल बिछाने या अतिरिक्त मोबाइल टावर लगाने की जरूरत कम होगी और कम लागत में हाई-स्पीड इंटरनेट ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा। ऐसे में बताया जा रहा है कि अगर यह योजना सफल होती है तो ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
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एयरटेल ने क्यों जताई आपत्ति?
इस मामले में एयरटेल का कहना है कि 26GHz बैंड में किसी भी नई तकनीक का इस्तेमाल वैश्विक 3GPP मानकों के अनुरूप होना चाहिए। जिसको लेकर कंपनी को डर है कि हाई-पावर WiFi सिस्टम शुरू होने से मौजूदा 5G नेटवर्क के सिग्नल प्रभावित हो सकते हैं। इतनी ही नहीं एयरटेल ने यह भी चिंता जताई है कि इससे यूजर्स को अधिक रेडिएशन का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं जैसे Starlink और OneWeb के संचालन पर भी असर देखने को मिलेगा।
सरकार कर रही है गहन जांच
बता दें कि फिलहाल के लिए सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। वहीं दूरसंचार क्षेत्र की संस्था TSDSI इस बैंड में WiFi तकनीक के इस्तेमाल के लिए नियम तैयार कर रही है। इसके अलावा यह भी तय किया जा रहा है कि कितनी पावर लिमिट तय की जाए ताकि रेडिएशन और सिग्नल इंटरफेरेंस जैसी समस्याओं को कम किया जा सकेंगा।
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भारत बना सकता है नया रिकॉर्ड
ऐसे में मामले को देखते हुए बताया जा रहा है कि अगर जियो के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो भारत दुनिया का पहला देश बन सकता है जो मोबाइल सेवाओं के लिए आवंटित 5G स्पेक्ट्रम का उपयोग WiFi आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए करेगा। लेकिन अभी के लिए देश में WiFi मुख्य रूप से 2.4GHz, 5GHz और लोअर 6GHz बैंड पर संचालित होता है।
