India AI Impact Summit 2026 में भारत ने पेश किया MANAV विज़न, AI से होगा गांव से ग्लोबल तक विकास

India AI Impact Summit 2026 के ऐतिहासिक मंच से प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत को दुनिया के "AI-enabled ecosystem" का केंद्र बताया। इसके साथ ही MANAV विजन पर बात की।
India presented MANAV vision at India AI Impact Summit 2026, AI will drive development from village to global
Narendra Modi (Source. YouTube)
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MANAV Vision: नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 के ऐतिहासिक मंच से प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत को दुनिया के "AI-enabled ecosystem" का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सभ्यता के इतिहास का वैसा मोड़ है जैसा आग की खोज या लिखित भाषा के आविष्कार के समय आया था। दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत ने AI को मानव कल्याण से जोड़ते हुए एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया।

क्या है "MANAV" विज़न?

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में "MANAV" विज़न पेश किया, जो AI को मानव केंद्रित बनाने की पांच सूत्रीय योजना है:

  • M: Morals and Ethical Systems: AI को नैतिक मूल्यों के आधार पर संचालित किया जाए, ताकि यह मानवता के हित में रहे।
  • A: Accountable Governance: पारदर्शी नियम, सशक्त निगरानी और डेटा पर राष्ट्रीय अधिकार सुनिश्चित हों।
  • N: National Sovereignty: "whose data, their rights," यानी डेटा जिस देश का, अधिकार भी उसी का।
  • A: Accessible and Inclusive: AI किसी एक कंपनी या देश का एकाधिकार न बने, बल्कि ग्लोबल साउथ सहित सभी के सशक्तिकरण का माध्यम बने।
  • V: Valid and Legitimate: AI सिस्टम कानूनी, सत्यापन योग्य और वैध ढांचे पर आधारित हों।

AI बने Global Common Good

प्रधानमंत्री ने उन देशों की सोच को चुनौती दी जो AI को गोपनीय रणनीतिक संपत्ति मानते हैं। उन्होंने कहा, "sunlight is the best disinfectant," यानी पारदर्शिता ही सबसे बड़ा समाधान है। भारत ओपन-सोर्स कोड और तकनीक साझा करने का समर्थन करता है, ताकि दुनिया भर के युवा मिलकर AI को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकें। यह सोच भारतीय दर्शन "Sarvajan Hitaye Sarvajan Sukhaye" पर आधारित है।

डीपफेक से निपटने के लिए 'Nutrition Labels' जैसा सिस्टम

बढ़ते डीपफेक और फर्जी डिजिटल कंटेंट को लेकर पीएम मोदी ने वैश्विक मानक बनाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल सामग्री के लिए "authenticity levels" तय किए जाएं, ठीक वैसे जैसे खाने के पैकेट पर न्यूट्रिशन लेबल होते हैं, ताकि लोग असली और AI-जनित जानकारी में फर्क समझ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि AI स्पेस "child-safe and family-guided" होना चाहिए।

Bhaya नहीं, AI में है भारत का Bhagya

नौकरियों पर खतरे की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य में इंसान और मशीनें "co-create, co-work, and co-evolve" करेंगी। उन्होंने कहा कि जहां कुछ देश AI में डर देखते हैं, वहीं भारत इसमें भाग्य देखता है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने दुनिया को आमंत्रण दिया: "Design and Develop in India, Deliver to the World, Deliver to Humanity"

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