विदर्भ ने कोंकण को पछाड़ा! इस गर्मी 'जलसमृद्ध' रहेंगे नागपुर और अमरावती विभाग; पढ़ें रिपोर्ट

Maharashtra Water Resources Department: इस गर्मी विदर्भ में नहीं होगा जलसंकट! नागपुर और अमरावती विभाग के बांधों में 70% से अधिक जलसंग्रह। कोंकण से भी बेहतर स्थिति, जानें विस्तृत आंकड़े।
Vidarbha stays water-rich this summer. Nagpur and Amravati divisions record over 70% water storage, surpassing Konkan's levels.
विदर्भ के बांध (कंसेप्ट फोटो)
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Vidarbha Water Storage 2026: आमतौर पर विदर्भ भीषण गर्मी वाला क्षेत्र माना जाता का जबकि कोंकण की पहचान अधिक वर्षा वाले इलाके के रूप में होती है। लेकिन इस वर्ष की गर्मियों में कोंकण से अधिक जलसमृद्ध विदर्भ रहने वाला है। जलसंपदा विभाग द्वारा जारी उपयोगी जलसंग्रह के आंकड़ों के अनुसार विदर्भ के अमरावती और नागपुर विभागों के बांध पर्याप्त जलसंग्रह से भरे हुए हैं।

पानी की उपलब्धता भरपूर है, लेकिन उसका नियोजित और संतुलित उपयोग करना प्रशासन के लिए बेहद जरूरी है। यदि बिना योजना के पानी का उपयोग किया गया तो हर वर्ष की तरह इस बार भी गर्मियों में जलसंकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

किस विभाग में कितना जलसंग्रह ?

विभाग (Division) जलसंग्रह प्रतिशत (Storage %)
नाशिक 73.94%
अमरावती 73.56%
छत्रपति संभाजीनगर 73.38%
पुणे 70.22%
नागपुर 70.13%
कोंकण 65.50%
कुल राज्य औसत (2026) 71.20%
पिछले वर्ष का औसत (2025) 63.89%

फरवरी का आधा महीना बीत चुका है और राज्य में तापमान बढ़ने लगा है। इसके साथ ही आने वाले समय में पानी की मांग भी बढ़ेगी। इसलिए राज्य के विभिन्न बांधों में उपलब्ध जलसंग्रह पर सभी की नजर टिकी हुई है। इस वर्ष राज्य में जलसंग्रह की स्थिति संतोषजनक दिखाई दे रही है। राज्य के कुल 2,997 बांधों में वर्तमान में 71.20 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह उपलब्ध है।

विशेष बात यह है कि पिछले वर्ष इसी तारीख को राज्य का औसत जलसंग्रह 63.89 प्रतिशत था। यानी गत वर्ष की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक पानी उपलब्ध है, जिससे इस वर्ष गर्मियों में जलसंकट का असर कम रहने की संभावना है। हर वर्ष जलसंकट का सामना करने वाले नागपुर विभाग के बांधों में इस समय 70.13 प्रतिशत तथा अमरावती विभाग में 73.56 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह है। यह प्रतिशत अधिक वर्षा वाले कोंकण विभाग 65.50 प्रतिशत से भी काफी ज्यादा है।

वर्षा की अतिवृष्टि का गर्मी में फायदा

इस वर्ष महाराष्ट्र में हुई अतिवृष्टि का सबसे अधिक असर विदर्भ पर पड़ा था। वर्षा ऋतु में नुकसान झेलने वाले विदर्भ को अब गर्मियों में पानी की प्रचुरता का लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि तापमान बढ़ने के साथ ही बांधों में पानी के वाष्पीकरण की गति भी तेज होगी। इसलिए उपलब्ध जल का उचित नियोजन प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

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