इंडियन एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष मिशन से पहले रखे गए क्वारंटीन में
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एक्सिओम मिशन 4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने से पहले क्वारंटीन में चले गए हैं। उनके साथ मिशन के अन्य तीन एस्ट्रोनॉट्स भी शामिल है।
- Written By: सिमरन सिंह
shubhanshu shukla का क्या है रिश्ता। (सौ. X)
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एक्सिओम मिशन 4 के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने से पहले क्वारंटीन में चले गए हैं। उनके साथ मिशन के अन्य तीन एस्ट्रोनॉट्स भी शनिवार को इस विशेष क्वारंटीन प्रक्रिया में शामिल हुए। यह प्रक्रिया अंतरिक्ष में संक्रमण रहित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।
शुभांशु शुक्ला ने जताया विश्वास
मिशन में शामिल होने से पहले शुभांशु शुक्ला ने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि एक्सिओम मिशन सफल होगा। यह कमर्शियल स्पेस फ्लाइट के लिए मील का पत्थर साबित होगा।” एक्सिओम स्पेस द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स को विदाई दी गई।
चार देशों के चार एस्ट्रोनॉट्स होंगे मिशन का हिस्सा
8 जून को लॉन्च होने वाले एक्सिओम 4 मिशन में भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स शामिल हैं। भारत से शुभांशु शुक्ला, पोलैंड से स्लावोज़ उज़्नान्स्की, हंगरी से टिबोर कापू और अमेरिका से पैगी व्हिटसन मिशन का हिस्सा होंगे। व्हिटसन का यह दूसरा कमर्शियल स्पेस मिशन होगा।
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शुभांशु की प्रोफाइल: IAF पायलट से अंतरिक्ष यात्री तक
लखनऊ के निवासी शुभांशु शुक्ला ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद NDA क्लियर किया और IAF में शामिल हुए। उन्होंने 2006 में फाइटर विंग जॉइन किया और 2,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव हासिल किया है। वे मिग-21, सुखोई-30, जगुआर, हॉक सहित कई लड़ाकू विमानों को उड़ा चुके हैं।
स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल बनेगा मिशन का माध्यम
यह मिशन स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च की तिथि मिशन की तैयारियों पर निर्भर करेगी।
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एक्सिओम 4 का उद्देश्य
इस मिशन का मकसद माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग, नई टेक्नोलॉजी का परीक्षण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और एजुकेशनल एक्टिविटीज के जरिए जागरूकता फैलाना है। एक्सिओम स्पेस भविष्य में प्राइवेट स्पेस स्टेशन ‘Axiom Station’ की स्थापना की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
ISS: पृथ्वी की कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोगशाला
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित एक विशाल अंतरिक्ष प्रयोगशाला है, जो हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा करता है। यह नासा, रूस, जापान, यूरोप और कनाडा की सहयोगी परियोजना है।
