सड़क पर चलते-चलते 35 सेकंड में खुल जाएगा अपराधियों का पूरा रिकॉर्ड, लॉन्च हुआ Abhigyan ऐप
Abhigyan App: पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का फिंगरप्रिंट मौके पर ही स्कैन करके उसका आपराधिक रिकॉर्ड को कुछ ही सेकंड में निकाल सकती है। जिसके लिए NCRB ने अभिज्ञान नाम का ऐप है।
- Written By: सिमरन सिंह
Abhigyan App (Source. Social media/ X)
NAFIS Fingerprint Database: देश में अपराध नियंत्रण और जांच व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बता दें कि अब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का फिंगरप्रिंट मौके पर ही स्कैन करके उसका आपराधिक रिकॉर्ड को कुछ ही सेकंड में निकाल सकती है। जिसके लिए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने Abhigyan नाम का नया मोबाइल ऐप बनाया है। जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लॉन्च भी कर दिया है। वहीं इस ऐप के बारे में बताए तो यह देश के सबसे बड़े फिंगरप्रिंट डेटाबेस NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) से जुड़ा हुआ है। जहां लाखों आरोपियों, दोषियों और कैदियों के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं।
सड़क पर ही होगी संदिग्धों की पहचान
पहले के समय में किसी भी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट का मिलान करने के लिए उसे थाने या जिला मुख्यालय ले जाना पड़ता था। लेकिन नए सिस्टम के आने के बाद पुलिसकर्मी सड़क पर ही पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर की मदद से अंगूठे के निशान लेकर जांच को पूरा कर सकते है। इसमें सबसे खास बात यह है कि फिंगरप्रिंट स्कैन करने के बाद उसका मिलान महज 35 सेकंड में राष्ट्रीय डेटाबेस से पूरा हो जाता है। जिससे वांटेड अपराधियों और फरार आरोपियों को पकड़ना आसान और तेज हो जाता है।
आज NCRB का ‘ABHIGYAN’ मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया। 1.3 करोड़ फिंगरप्रिंट के डेटाबेस NAFIS का यह पोर्टेबल वर्जन ऑन-फील्ड पुलिस कर्मियों को सीधे उनके स्मार्टफोन पर अपराधियों के विशाल डेटाबेस तक पहुँचने की शक्ति देता है। टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित यह ऐप चंद सेकंड में रियल-टाइम… pic.twitter.com/wH5iYZtWJD — Amit Shah (@AmitShah) June 19, 2026
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स्मार्टफोन पर मिलेगा रियल-टाइम रिजल्ट
रिपोर्ट्स में जानकारी सामने आई है कि अभी देशभर में फिंगरप्रिंट जांच की सुविधा केवल 1,556 वर्कस्टेशनों तक सीमित है। ऐसे में जांच प्रक्रिया में समय लगता था। लेकिन Abhigyan ऐप के जरिए पुलिस अधिकारी सीधे अपने स्मार्टफोन पर संदिग्ध का रिकॉर्ड देख सकते है। वहीं बता दें कि यह ऐप टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित होगा और रियल-टाइम में परिणाम सामने लाएगा। इससे जांच एजेंसियों की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ-साथ अपराधियों की पहचान भी तेज हो जाएगी।
1.3 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड होंगे उपलब्ध
NAFIS डेटाबेस के बारे में बताए तो उसमें लगभग 1.3 करोड़ संदिग्धों और दोषियों की जानकारी पहले से मौजूद है। इसमें 9.91 लाख नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों, 3.65 लाख मानव तस्करी मामलों और जेल रिकॉर्ड का बड़ा डाटा शामिल है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पुलिसिंग को अधिक वैज्ञानिक और डेटा-आधारित बना देगी।
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अमित शाह ने टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर दिया जोर
रिपोर्ट्स में सामने आया है कि अभिज्ञान ऐप को लॉन्च करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सिर्फ अपराधियों को पकड़ना जरूरी नहीं है बल्कि तय समय सीमा में उन्हें सजा दिलाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिंगरप्रिंट, डीएनए, मोबाइल टावर डेटा, फेशियल रिकॉग्निशन और आईरिस स्कैन जैसे वैज्ञानिक साक्ष्यों का बेहतर उपयोग अपराधियों को सजा दिलाने में जरूरी भूमिका निभा सकता है। माना जा रहा है कि यह नई तकनीक भारत की कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने में अहम योगदान देगी।
