रोहित पवार को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार
- Written By: अनिल सिंह
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एकतरफा कार्रवाई अमान्य
- नए सिरे से निरिक्षण कर नोटिस जारी करने का आदेश
मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट (High Court) ने एनसीपी विधायक रोहित पवार (Rohit Pawar) को बड़ी राहत दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) को कड़ी फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड की एकतरफा कार्रवाई को अमान्य (Invalid) किया। नए सिरे से निरिक्षण कर नोटिस (Notice) जारी करने का आदेश दिया है साथ ही यह भी कहा है कि बारामती एग्रो को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। उनका पक्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मंजूर है या नहीं उसके बाद निर्धारित किया जाए।
जानिए क्या है मामला
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ दिन पहले रोहित पवार की कंपनी बारामती एग्रो को नोटिस भेजा था। इस नोटिस में आदेश था कि बारामती एग्रो के प्लांट को अगले 72 घंटों के अंदर बंद कर दिया जाए। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया। रोहित पवार ने कहा था कि दो बड़े नेताओं के अनुरोध पर बारामती एग्रो को नोटिस दिया गया था। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें गुरुवार को बड़ी राहत दी है।
पक्ष सुने बिना एकतरफा कार्रवाई अमान्य, हाईकोर्ट का निर्देश
बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस को रद्द कर दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नए सिरे से निरीक्षण करे और नोटिस जारी करे। रोहित पवार को 15 दिन का समय दें और उनसे जवाब मांगें। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि बोर्ड अपना फैसला बाद में लें।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में भर्ती नोटिस पर हाईकोर्ट सख्त, न्यायाधिकरणों की निष्क्रियता पर फटकार; मुख्य सचिव से मांगा जवाब
अतिक्रमणकारियों को हाईकोर्ट का सख्त संदेश: सार्वजनिक जमीन खाली कराने के आदेश में बदलाव से साफ इनकार
Nagpur: परीक्षा केंद्र बदलने पर हाई कोर्ट की रोक, अब मूल कॉलेज में ही होगी परीक्षा, छात्रों को बड़ी राहत
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्रेच्युटी कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है, बर्खास्तगी के आधार पर इसे रोकना गैरकानूनी
कार्रवाई नहीं करने का निर्देश
जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच ने अहम निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक बार फिर निरीक्षण करना चाहिए और आपत्तियों पर नए सिरे से नोटिस जारी करना चाहिए। नए नोटिस का जवाब देने के लिए बारामती एग्रो को 15 दिन का समय दें। यदि खुलासा संतोषजनक नहीं हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि पक्षों को सुने बिना एकतरफा कार्रवाई अमान्य है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।
