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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ग्रेच्युटी कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है, बर्खास्तगी के आधार पर इसे रोकना गैरकानूनी

Chhatrapati Sambhajinagar: अदालत ने स्पष्ट किया कि अनधिकृत अनुपस्थिति के आधार पर ग्रेच्युटी रोकना अवैध है; यह कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार है और केवल विशिष्ट गंभीर अपराधों में ही इसे रोका जा सकता है।

  • Author By Rajesh Bagde | published By रूपम सिंह |
Updated On: Apr 26, 2026 | 03:22 PM
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Maharashtra Civil Services: संभाजीनगर, नवभारत न्यूज नेटवर्क। सेवा से बर्खास्त किए गए कर्मचारी को ग्रेच्युटी उपदान देने से इनकार करना गैरकानूनी है। ग्रेच्युटी मालिक की मर्जी नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है।

अनधिकृत अनुपस्थिति के आधार पर बर्खास्त किए गए 76 वर्षीय शिक्षक को राहत देते हुए अदालत ने बीड जिला परिषद के शिक्षा अधिकारी के पुराने आदेश को रद्द कर चार सप्ताह के भीतर ग्रेच्युटी की राशि देने का निर्देश दिया है। यह आदेश मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ के न्यायमूर्ति नितीन सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति वैशाली पाटीलजाधव ने दिया।

प्रभाकर ज्ञानोजी वैद्य बीड जिला परिषद में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। अनधिकृत अनुपस्थिति के कारण 11 फरवरी 2009 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन शिक्षा अधिकारी प्राथमिक ने 29 मार्च 2023 को उनका आवेदन खारिज कर दिया।

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उन्हें बताया गया कि महाराष्ट्र सिविल सेवा पेंशन नियम, 1982 के अनुसार बर्खास्त कर्मचारी को ग्रेच्युटी देने का प्रावधान नहीं है। इस निर्णय को वैद्य ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

क्या कहा हाईकोर्ट ने अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित कर्मचारी का मामला पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत आता है। इस कानून की धारा 46 के अनुसार केवल संपत्ति को नुकसान, हिंसा या नैतिक अधपतन से जुड़े अपराध सिद्ध होने पर ही ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है।

इस मामले में केवल अनुपस्थिति के आधार पर ग्रेच्युटी से इनकार करना गलत है। अदालत ने कहा कि ग्रेच्युटी कर्मचारी की जीवनभर की निष्ठापूर्ण सेवा का प्रतिफल है और यह संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संरक्षित अधिकार है।

खंडपीठ ने बीड जिला परिषद का आदेश रद्द करते हुए प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी की गणना चार सप्ताह के भीतर कर, उसके बाद दो सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश दिया है।

Bombay high court ruling gratuity is statutory right not employers discretion

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Published On: Apr 26, 2026 | 12:00 AM

Topics:  

  • Chhatrapati Sambhajinagar
  • Education News
  • High Court

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