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नासिक सिविल हॉस्पिटल ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, चरम पर रही अव्यवस्था, गंदगी, दवाओं की कमी और लापरवाही

  • Written By: अनिल सिंह
Updated On: Dec 28, 2023 | 04:12 PM
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नासिक: शहर के अधिकतर नागरिक सिविल अस्पताल का नाम सुनते ही मुंह बनाने लगते हैं। नासिक जिला अस्पताल में अव्यवस्था, गंदगी, दवाओं की कमी, चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिला अस्पताल साल 2023 में सुर्खियों में बना रहा। वर्ष के अंतिम चरण में जिला अस्पताल का प्रभार बदलते ही कुछ बदलाव महसूस होने लगा है मानो अस्पताल दम तोड़ रहा हो। लेकिन आम जनता को उम्मीद है कि यह बदलाव कायम नहीं रहेगा और अस्पताल में सुधार आएगा। 
पिछले वर्ष अव्यवस्थाओं को लेकर जिला अस्पताल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। स्वास्थ्य विभाग के तहत दवाओं की आपूर्ति को लेकर पूरे राज्य में एक समस्या उत्पन्न हुई, जैसा कि नासिक  जिला अस्पताल में हुआ था। दवा का स्टॉक अपर्याप्त पाया गया। जिला अस्पताल से संबद्ध एक पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कॉलेज शुरू किया गया। इससे कर्मचारी तो उपलब्ध हो गए, लेकिन प्रशासनिक कठिनाइयाँ हमेशा बड़ी बनी रहीं। 
 

इसलिए, पिछले जुलाई में सरकार ने स्थानांतरण रद्द कर दिया और जिला सर्जनों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी। मरीजों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए अतिरिक्त 100 बेड की मंजूरी दी गई। ऐसे में 730 बेड वाले जिला अस्पताल में अब 830 बेड हो गए हैं। सिंहस्थ भवन में नवीन गहन चिकित्सा इकाई संचालित है। 

नये साल में यह चालू हो जाएगा। ट्रॉमा केयर भवन को भी मंजूरी मिल गई है और काम जारी है। जिला अस्पताल में इलाज कराने के लिए मरीजों को केस पेपर के लिए 10 रुपये चुकाने पड़ते थे। लेकिन सरकार ने मरीजों के लिए केस पेपर फ्री करने का फैसला किया है। इसके चलते देखा गया है कि मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। 

जिला अस्पताल में प्रतिदिन कम से कम डेढ़ हजार मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। जिले में आदिवासी क्षेत्र अधिक है। प्रसूति विभाग में प्रसव और सर्जरी महत्वपूर्ण हैं। हर दिन औसतन 10 से 15 महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं। प्राकृतिक प्रसव की दर भी अधिक है। 

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पिछले कुछ वर्षों में जिला अस्पताल में प्रशासनिक अराजकता पैदा हो गई थी। पिछले नवंबर में नवनियुक्त जिला सर्जन डा. चारुदत्त शिंदे के सत्ता संभालने के बाद अहम बदलाव महसूस होने लगे हैं। विशेषकर स्वच्छता और कार्य योजना पर सख्ती होने लगी है। 

मुख्य रूप से जिला अस्पताल में किसी भी काम के लिए पैसे की जरूरत नहीं होती है। डॉ. शिंदे ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आम मरीजों को बड़ी राहत मिली है। कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय के कारण मरीजों को तुरंत इलाज मिल रहा है। 

यह पहले भी उपलब्ध था लेकिन मरीजों को इसके लिए भुगतान  करना पड़ता था, जिसे अब बंद कर दिया गया है। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्ष में जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। 

Nashik civil hospital break record in carelessness

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Published On: Dec 28, 2023 | 04:12 PM

Topics:  

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