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कागजों पर सिमटती ग्रामीण विकास की संकल्पना ,आदर्श गांव, शौच मुक्त और स्वच्छता अभियानों की अनदेखी

Rural Development Neglect: गोंदिया जिले में ग्रामसेवकों की अनुपस्थिति और स्थानीय राजनीति के कारण आदर्श गांव, शौच मुक्त और स्वच्छता अभियानों की योजनाएं कागजों तक सीमित होती जा रही हैं।

  • Written By: आंचल लोखंडे
Updated On: Feb 03, 2026 | 05:29 PM

model village scheme (सोर्सः सोशल मीडिया)

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Gondia Gram Panchayat: गोंदिया जिले में 556 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों के प्रशासन और विकास कार्यों के संचालन के लिए सरकार द्वारा ग्रामसेवक और ग्राम विकास अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। बावजूद इसके, अधिकांश ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर ग्राम विकास अधिकारी या ग्रामसेवक की नियमित उपस्थिति नहीं होने के कारण ग्राम पंचायतें जिन्हें ग्रामीण विकास का मंदिर कहा जाता है। विकास से वंचित होती जा रही हैं।

स्थिति यह है कि कई ग्रामसेवक मुख्यालय छोड़कर तहसील या जिला स्तर पर निवास करते हुए वहीं से ग्रामीण विकास से जुड़े मामलों का संचालन कर रहे हैं। गांवों में सरपंच, स्वयंभू नेता और विरोधी गुटों को आपस में उलझाकर अपने कार्य साधे जा रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रगतिशील ग्रामीण विकास की संकल्पना कमजोर पड़ती जा रही है। गांवों में यह हृदयविदारक तस्वीर सामने आ रही है कि आदर्श गांव, खुले में शौच मुक्त अभियान और ग्राम स्वच्छता अभियान जैसी योजनाओं की लगातार अनदेखी हो रही है।

गांवों में गुटबाजी की राजनीति तेज

किसी भी गांव के विकास में ग्राम पंचायत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन आज ये संस्थाएं राजनीति का अड्डा बनती जा रही हैं। गांवों में गुटबाजी की राजनीति तेज हो गई है, जिससे सामाजिक तनाव और हिंसा जैसी स्थितियां भी उत्पन्न हो रही हैं। रोजगार के अवसरों के अभाव में ग्रामीणों का शहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है। इस पूरी स्थिति के लिए राजनेता, प्रशासनिक तंत्र में शामिल ग्रामसेवक तथा नागरिकतीनों ही किसी न किसी रूप में जिम्मेदार नजर आते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ग्रामीण नागरिकों को अपने मूल अधिकारों की समुचित जानकारी नहीं है। यदि कोई व्यक्ति आवाज उठाने का प्रयास करता है, तो उसे व्यवस्थित रूप से दबा दिया जाता है।

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सच्चा भारत गांवों में बसता

महाराष्ट्र में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को अपनाया गया, क्योंकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि “सच्चा भारत गांवों में बसता है।” उन्होंने ‘चलो गांव की ओर’ का आह्वान करते हुए ग्रामस्वराज की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों का सशक्तिकरण था। आज भी इस विचारधारा की प्रासंगिकता उतनी ही बनी हुई है। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता, निवेश और रोजगार सृजन से ही शहरों में बढ़ती भीड़ और बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव है।

गांधीजी ने स्वतंत्रता-पूर्व काल में ही कहा था कि प्रत्येक गांव को आत्मनिर्भर बनना चाहिए और उसके लिए प्राथमिक स्तर पर सुनियोजित प्रयास आवश्यक हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश आज ग्राम पंचायतें राजनीतिक गढ़ बनती जा रही हैं, जो विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी हैं। प्रशासन से मांग है कि वह इस गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान दे।

योजनाओं के प्रति जागरूकता आवश्यक

सरकार द्वारा आदर्श गांव, सांसद ग्राम योजना, शौच मुक्त गांव और स्वच्छता अभियान जैसी कई योजनाएं लागू की गई हैं। इनके तहत राज्य में अनेक आदर्श गांव विकसित भी हुए हैं। हालांकि, कई गांव ऐसे भी हैं जहां ये योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह गई हैं। स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक लापरवाही के कारण ग्रामसेवकों के मुख्यालय समाप्त हो गए हैं, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस विषय में व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है।

ये भी पढ़े: कौन बनेगा NCP चीफ? प्रफुल्ल पटेल ने खुद दी जानकारी, फैलाई जा रही गलत खबरों पर जताया खेद

मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी

जब तक नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक ग्राम पंचायतें दोबारा बुनियादी विकास के केंद्र नहीं बन सकतीं। वसंतराव नाईक समिति की सिफारिशों के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र जिला परिषद और पंचायत समिति अधिनियम, 1961 पारित किया और 1 मई 1962 से जिला परिषद, पंचायत समिति तथा ग्राम पंचायत की त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था लागू की गई। इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य ग्रामीण विकास और जनभागीदारी को मजबूत करना था।

Gondia rural development gram panchayat neglect government schemes

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Published On: Feb 03, 2026 | 05:29 PM

Topics:  

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