
IPL Has Helped Overseas Players: इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने विदेशी खिलाड़ियों को भारत की डराने वाली और जुनूनी भीड़ के सामने खेलने के दबाव से निपटने में बड़ी मदद की है। भारत और श्रीलंका में अगले महीने शुरू होने वाले टी20 विश्व कप 2026 से पहले हुसैन ने कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों और माहौल का आदी बनाया है।
नासिर हुसैन ने कहा कि भारत में खेलते समय विरोधी टीमों को न सिर्फ मजबूत भारतीय टीम, बल्कि विशाल और भावनात्मक भीड़ का भी सामना करना पड़ता है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और भारत महिला टीम के बीच खेले गए विश्व कप सेमीफाइनल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जैसे ही मैच का मोमेंटम भारत की ओर जाता है, उसे पलटना बेहद मुश्किल हो जाता है। पहले के दौर में, जब सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज बल्लेबाज क्रीज पर आते थे, तो गेंदबाजों की आंखों में साफ डर दिखाई देता था।
पूर्व इंग्लैंड कप्तान ने कहा, “अब विदेशी खिलाड़ी नियमित रूप से भारत के बड़े स्टेडियमों में खेलते हैं, जहां वे उसी शोर, दबाव और उम्मीदों के बीच प्रदर्शन करते हैं। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत में खेलने के दौरान कम घबराहट महसूस होती है। फ्रेंचाइजी क्रिकेट का सबसे बड़ा असर यही है कि खिलाड़ी हालात, मैदान और भीड़ से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार करना सीख जाते हैं।”
पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने बताया कि समय के साथ भारतीय टीम का भी भीड़ के दबाव को देखने का नजरिया बदला है। 1996 विश्व कप सेमीफाइनल में भारतीय टीम दबाव को संभाल नहीं पाई थी। वहीं 2011 विश्व कप में गैरी कर्स्टन और मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन के मार्गदर्शन में टीम ने भीड़ को एक सकारात्मक ताकत के रूप में देखा।
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कार्तिक ने आगे कहा कि 2023 विश्व कप में भारतीय टीम ने घरेलू भीड़ से मिलने वाली ऊर्जा का बेहतरीन इस्तेमाल किया। उन्होंने न सिर्फ शानदार क्रिकेट खेला, बल्कि दर्शकों के समर्थन को अपने प्रदर्शन में बदलने में भी सफलता हासिल की। उनके अनुसार, यही मानसिक बदलाव आधुनिक भारतीय क्रिकेट और आईपीएल संस्कृति की सबसे बड़ी देन है। (एजेंसी इनपुट के साथ)






