HBD Murali Vijay: चुभ गई पिता की डांट…17 साल की उम्र में छोड़ा घर, फिर संघर्ष के दम पर कमाया नाम
Murali Vijay Birthday: 12वीं में कम अंक और पिता की डांट के बाद मुरली विजय ने घर छोड़ दिया,। फिर होटल में नौकरी की और मेहनत से भारतीय टीम तक पहुंचे और टेस्ट क्रिकेट में शानदार करियर बना डाला।
- Written By: संजय बिष्ट
मुरली विजय (फोटो- सोशल मीडिया)
Murali Vijay Biography: भारतीय क्रिकेट के शांत स्वभाव वाले सलामी बल्लेबाज Murali Vijay की कहानी संघर्ष, जिद और मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है। 12वीं कक्षा में कम अंक आने के बाद पिता की डांट ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ने का कठिन फैसला लिया और खुद अपने दम पर आगे बढ़ने की ठान ली। पेट पालने के लिए होटल में नौकरी की, लेकिन क्रिकेट के सपने को कभी नहीं छोड़ा। यही जज्बा उन्हें भारतीय टीम तक ले गया।
पढ़ाई में कमजोरी बनी जिंदगी का मोड़
मुरली विजय का जन्म 1 अप्रैल 1984 को तमिलनाडु में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट से गहरा लगाव था। वह अक्सर स्कूल से गायब होकर मैदान पर पहुंच जाते थे और घंटों अभ्यास करते थे। धीरे-धीरे क्रिकेट का यह जुनून उनकी पढ़ाई पर भारी पड़ने लगा। नियमित रूप से स्कूल न जाने के कारण 12वीं कक्षा में वह केवल 40 प्रतिशत अंक ही ला सके।
कम अंक देखकर उनके पिता बेहद नाराज हो गए और गुस्से में उन्होंने कड़ी बातें कह दीं। यहां तक कह दिया कि वह एक चपरासी बनने के लायक भी नहीं हैं। यह बात मुरली के दिल में घर कर गई और उन्होंने 17 साल की उम्र में घर छोड़ने का फैसला कर लिया।
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होटल की नौकरी और मैदान पर मेहनत
घर छोड़ने के बाद मुरली विजय ने अपना गुजारा चलाने के लिए होटल में नौकरी की। वहीं उन्हें रहने की जगह भी मिल गई। बाद में उन्होंने पार्लर में भी काम किया, लेकिन इन सबके बीच उनका असली फोकस क्रिकेट ही रहा।
22 गज की पिच पर उन्होंने दिन-रात मेहनत की। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें तमिलनाडु की अंडर-22 टीम में जगह मिली। इसके बाद क्लब क्रिकेट में भी उन्हें मौके मिलने लगे और उनका खेल लगातार निखरता गया।
घरेलू क्रिकेट से भारतीय टीम तक का सफर
साल 2006 में मुरली विजय ने तमिलनाडु के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। 2008 में रणजी ट्रॉफी के एक मुकाबले में उन्होंने अभिनव मुकुंद के साथ मिलकर 462 रनों की बड़ी साझेदारी की। यह पारी उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।
इसी दौरान उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने का बुलावा मिला। नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच खेला और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा।
टेस्ट क्रिकेट में बनाया बड़ा नाम
मुरली विजय ने अपनी मजबूत तकनीक के दम पर खासकर विदेशी पिचों पर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने भारत के लिए 61 टेस्ट मैचों में 46 की औसत से 3982 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 12 शतक और 15 अर्धशतक निकले।
सीमित ओवरों में मिला कम मौका
मुरली विजय ने 2010 में एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 17 मैचों में 339 रन बनाए। वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली और 9 मैचों में 169 रन ही बना सके।
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संन्यास के साथ खत्म हुआ सफर
घटती फॉर्म के चलते 2018 के बाद वह टीम से बाहर हो गए और वापसी नहीं कर सके। आखिरकार 30 जनवरी 2023 को मुरली विजय ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। उनकी कहानी आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
