कपिल देव भारतीय टीम के साथ (फोटो-सोशल मीडिया)
Kapil Dev Birthday: भारतीय क्रिकेट को विश्व मंच पर पहचान दिलाने वाले महान ऑलराउंडर और 1983 विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव आज 6 जनवरी को अपना 65वां जन्मदिन मना रहे हैं। तेज गेंदबाजी, आक्रामक बल्लेबाजी और बेहतरीन फील्डिंग के दम पर कपिल देव ने न सिर्फ भारतीय टीम को आत्मविश्वास दिया, बल्कि क्रिकेट की सोच और शैली को भी नई दिशा दी।
6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में जन्मे कपिलदेव रामलाल निखंज ने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। इसके बाद अक्टूबर 1978 में उन्हें पहले वनडे और फिर टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला। खास बात यह रही कि कपिल देव ने अपने करियर की शुरुआत पाकिस्तान के खिलाफ दोनों प्रारूपों में की।
अपने तीसरे ही टेस्ट मैच में कपिल देव ने पाकिस्तान के खिलाफ 33 गेंदों में भारत का सबसे तेज टेस्ट अर्धशतक लगाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1979-80 में पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज़ में उन्होंने ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 32 विकेट झटके और बल्ले से 278 रन बनाए। भारत ने छह मैचों की इस सीरीज़ को 2-0 से अपने नाम किया।
तेज और स्विंग गेंदबाजी के लिए मशहूर कपिल देव अपनी मैच जिताऊ पारियों के लिए भी जाने जाते थे। वह न सिर्फ एक घातक तेज गेंदबाज और आक्रामक बल्लेबाज थे, बल्कि एक बेहतरीन फील्डर के रूप में भी उनकी अलग पहचान थी।
कपिल देव के करियर की सबसे यादगार पारी 18 जून 1983 को विश्व कप में जिम्बाब्वे के खिलाफ आई। जब भारत ने महज 103 रन पर अपने पांच विकेट गंवा दिए थे और शीर्ष क्रम पूरी तरह फ्लॉप हो गया था, तब कप्तान कपिल देव ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 138 गेंदों में 6 छक्कों और 16 चौकों की मदद से नाबाद 175 रन बनाए और भारत को 60 ओवरों में 266/8 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
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इसके जवाब में जिम्बाब्वे की टीम 57 ओवरों में 235 रन पर सिमट गई। कपिल देव ने गेंदबाजी में भी योगदान देते हुए 11 ओवरों में 32 रन देकर 1 विकेट हासिल किया और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुने गए। दुर्भाग्यवश, बीबीसी की हड़ताल के कारण इस ऐतिहासिक मुकाबले का सीधा प्रसारण नहीं हो सका। इसी विश्व कप में कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार खिताब अपने नाम किया।
अपने शानदार करियर में कपिल देव ने 131 टेस्ट मैचों की 227 पारियों में 31.05 की औसत से 5,248 रन बनाए और 434 विकेट हासिल किए। वहीं 225 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 3,783 रन बनाने के साथ 253 विकेट अपने नाम किए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कपिल देव ने 275 पारियों में 18 शतकों के साथ 11,356 रन बनाए, जबकि 310 लिस्ट-ए मैचों में 5,481 रन और 335 विकेट झटके। वह टेस्ट इतिहास में 5,000 रन और 400 विकेट का डबल पूरा करने वाले पहले खिलाड़ी बने।
क्रिकेट में उनके अतुलनीय योगदान के लिए कपिल देव को 1979-80 में अर्जुन पुरस्कार, 1982 में पद्मश्री, 1983 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर और 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, 2008 में उन्हें भारतीय प्रादेशिक सेना द्वारा लेफ्टिनेंट कर्नल का मानद पद प्रदान किया गया। साल 2010 में कपिल देव को आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया और 2013 में उन्हें सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। आज भी कपिल देव भारतीय क्रिकेट के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा मार्गदर्शन देता रहेगा।