समीर अंजान (फोटो- सोशल मीडिया)
Sameer Anjaan Birthday Story: गीतकार समीर अंजान का जन्म 24 फरवरी 1958 को वाराणसी में हुआ था। समीर अंजान आज अपना 68वां जन्मदिन मना रहे हैं। समीर अंजान ने कॉमर्स की पढ़ाई की और बैंक की नौकरी भी की, लेकिन उनका मन शब्दों की दुनिया में बसता था। उनके पिता अंजान खुद हिंदी फिल्मों के नामी गीतकार थे और चाहते थे कि बेटा स्थिर नौकरी करे। मगर समीर सपनों का शहर मुंबई पहुंच गए।
पिता ने साथ रखने से पहले दो सवाल पूछे थे कि क्या कभी सच्चा प्यार किया है? समीर से पिता ने पहला सवाल किया है कि क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया? समीर ने जवाब दिया कि हां, किया। पिताजी ने पलटकर पूछा कि क्या सोचकर किया? समीर ने जवाब दिया कि कोई सोचकर प्यार थोड़े करता है। समीर के पिता ने दूसरा सवाल किया कि तुम क्या ये सोचके मुंबई आए हो कि ये जन्नत है? समीर ने कहा कि हां, पिता ने कहा कि जन्नत पाने के लिए जानते हो क्या करना पड़ता है।
समीर के पिता ने तीसरी बात जो कही वो एक शर्त थी। समीर के पिता ने कहा कि जो भी तुम मुझसे मांगोगे मैं तुमको दे दूंगा लेकिन कभी मुझसे गाने में मदद मांगोगे तो घर से बाहर कर दूंगा। समीर ने सब शर्ते मानीं और फिल्मों में कूद गए। साल 1983 से फिल्मों में सक्रिय हुए समीर को असली पहचान 1990 में आशिकी और फिल्म दिल के गीतों से मिली। इसके बाद 90 का दशक जैसे उनकी कलम के नाम हो गया। साजन के ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’ और ‘देखा है पहली बार’, ‘दीवाना’, ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘धड़कन’ जैसी फिल्मों के गीतों ने प्रेम को नई भाषा दी।
समीर अंजान के लिखे शब्द सीधे दिल में उतरते थे, क्योंकि वे वही लिखते थे जो उन्होंने जिया। समीर अंजान के नाम 4000 से ज्यादा गाने लिखने का रिकॉर्ड दर्ज है, जो उन्हें गीतकारों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करता है। ‘नजर के सामने’ जैसे गीत उन्होंने अपने पहले प्यार की याद में लिखे थे। शायद यही सच्चाई और अनुभव उनके गीतों को कालजयी बनाते हैं। कहना गलत नहीं होगा कि अगर समीर अंजान के गीत ना होते, तो 90 के दशक की फिल्मों का जादू अधूरा रह जाता।