कैलाश सोमानी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Rajasthan Royals Owner Kailash Somani IPL: 15 अगस्त 1974 को वाशिम में जन्मे कैलाश सोमानी (काल सोमानी) ने जिस सफर की शुरुआत एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से की थी, वही सफर आज वैश्विक कारोबार की दुनिया में एक मजबूत पहचान बन चुका है।
एडटेक, डेटा प्राइवेसी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में खड़ा किया गया उनका व्यवसाय अब उस मुकाम पर है, जहां से उन्होंने राजस्थान रॉयल्स जैसी प्रतिष्ठित टीम को खरीदकर यह दिखा दिया है कि सही दिशा में बढ़ाया गया हर कदम, अंततः असाधारण उपलब्धियों तक ही पहुंचता है।
यह दृढ़ता और महत्वाकांक्षा की कहानी है। यह दृढ़ संकल्प और दूरदृष्टि से सपनों को साकार करने की कहानी है, लेकिन इन पंक्तियों से आगे एक और बड़ी सच्चाई छिपी है- रणनीति, जोखिम और उस सोच की, जो साधारण शुरुआत को असाधारण उपलब्धि में बदल देती है।
इंडियन प्रीमियर लीग में फ्रेंचाइजी खरीदने तक का उनका सफर सिर्फ प्रेरणादायक नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी है। 1.63 अरब डॉलर (करीब 15,286 करोड़ रुपये) में राजस्थान रॉयल्स के अधिग्रहण के बाद वह वैश्विक खेल निवेशकों की विशिष्ट श्रेणी में शामिल हो गए हैं।
सोमानी का बचपन एक मध्यमवर्गीय परिवार में बीता, जहां आर्थिक तंगी हकीकत थी। पिता नंदकिशोर सोमानी के असामयिक निधन के बाद महज 16 वर्ष की उम्र में उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना आधार बनाया।
वाशिम के मुलीबाई चरखा विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद शेगांव स्थित संत गजानन महाराज कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव होने के बावजूद उनके घर में टीवी तक नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में मोड़ा। यही निर्णय आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
वैश्विक सफलता के बावजूद काल सोमानी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अकोला-नागपुर राजमार्ग पर तलेगांव शामजीपंत में क्रिकेट अकादमी स्थापित कर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने का कार्य किया है। साथ ही वंचित छात्रों के लिए 1 करोड़ रुपये का योगदान देकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए हैं।
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वर्तमान में वह अमेरिका में रहते हैं, जहां उनकी मां लीलादेवी भी उनके साथ रहती हैं। उनके बेटे अर्जुन ने अंडर-14 गोल्फ में विश्व चैंपियन बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। परिवार आज भी विदर्भ क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। उनकी बहन डॉ। रश्मि बजाज अकोला में निवास करती हैं, जबकि वाशिम के जवाहर कॉलोनी में उनका पुश्तैनी घर आज भी मौजूद है।