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Ashes 2025: अखबार की एक खबर ने डाल दी थी एशेज की नींव, टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी राइवलरी की कहानी

When was Ashes Series Started: एशेज सीरीज 1882 में ऑस्ट्रेलिया की इंग्लैंड पर जीत से शुरू हुई। नकली शोक संदेश और ‘एशेज’ शब्द से प्रेरित, अब 2025 में पांच मैचों की नई सीरीज होगी।

  • By उज्जवल सिन्हा
Updated On: Nov 18, 2025 | 10:58 AM

एशेज ट्रॉफी (फोटो- सोशल मीडिया)

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When was Ashes Series Started: एशेज सीरीज 2025 की शुरुआत 21 नवंबर से होनी जा रही है। एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच पांच मैच खेला जाएगा। पिछली बार दोनों टीमों ने 2-2 से एशेज सीरीज को बराबरी पर खत्म किया था। अब इस बार दोनों टीमों की नजरें खिताब अपने नाम करने पर होगी।

आज आपको इस खबर में बताएंगे कि कैसे एशेज सीरीज की शुरुआत हुई थी। एक अग्रेंजी अखबार के हेडलाइन के कारण इस सीरीज की शुरुआत हुई थी। साल 1882 में ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड के दौरे पर गई थी, जहां ओवल में खेले गए टेस्ट में इंग्लैंड को 7 रन के करीबी अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी। जिसके बाद ब्रिटिश अखबार ने इंग्लैंड क्रिकेट की अंत की खबरें प्रकाशित कर दी।

ब्रिटिश अखबार ‘स्पोर्टिंग टाइम्स’ ने अंग्रेजी क्रिकेट के लिए एक नकली शोक संदेश छापा। इसमें लिखा था कि 29 अगस्त 1882 को ओवल मैदान में इंग्लिश क्रिकेट का अंत हो गया है। दोस्तों और परिचितों ने गहरा दुख व्यक्त किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें। शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा और राख ऑस्ट्रेलिया भेजी जाएगी।

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ब्रिटिश अखबार ने पहली बार एशेज शब्द का किया था इस्तेमाल

दरअसल ब्रिटिश साप्ताहिक अखबार ने ऑस्ट्रेलिया के हाथों इंग्लैंड की हार पर ‘द एशेज’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस ‘शोक संदेश’ के साथ क्रिकेट इतिहास में पहली बार ‘एशेज’ शब्द का इस्तेमाल हुआ। इस अवधारणा ने खेल प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया।

कुछ हफ्तों के बाद इवो ब्लाई की कप्तानी में इंग्लिश टीम ऑस्ट्रेलियाई के दौरे पर रवाना हुई। पिछली हार का बदला लेना टीम का मकसद था। कप्तान ब्लाई ने संकल्प लिया कि वह एशेज वापस लेने ऑस्ट्रेलिया जा रहे हैं। इंग्लैंड की टीम ने इस दौरे पर तीन टेस्ट खेले। इस दौरान ब्लाई और उनकी टीम के शौकिया खिलाड़ियों ने कई प्रैक्टिस मैच में भी हिस्सा लिया।

ब्लाई की नेतृत्व में इंग्लैंड ने जीती सीरीज

यह सीरीज 30 दिसंबर से शुरू होनी थी। पहला मैच मेलबर्न में खेला जाना था, जिससे पहले क्रिसमस की पूर्व संध्या पर मेलबर्न के बाहर रूपर्ट्सवुड एस्टेट में ब्लाई को उस एशेज के प्रतीक के रूप में एक छोटा-सा मिट्टी का कलश दिया गया, जिसे वापस पाने के लिए वह ऑस्ट्रेलिया गए थे। हालांकि, ब्लाई इसे एक निजी उपहार मानते थे। इस दौरे पर इंग्लैंड ने 2-1 से सीरीज अपने नाम की।

यह भी पढ़ें: WTC में अब आईसीसी की होगी पिच पर नजर, दो दिन में मैच निपटा तो कटेंगे प्वाइंट्स, कोलकाता टेस्ट के…

बेल्स को जलाकर उसकी राख इस कलश में भरी

ऐसी मान्यता है कि मेलबर्न की महिलाओं ने बेल्स को जलाकर उसकी राख को इस कलश में भरकर दिया था। इस मौके पर ब्लाई की मुलाकात फ्लोरेंस मॉर्फी से हुई, जो रूपर्ट्सवुड एस्टेट की मालकिन लेडी जेनेट क्लार्क की क्लासमेट और क्लार्क परिवार की गवर्नेस थीं। साल 1884 में फ्लोरेंस मॉर्फी से ही ब्लाई ने शादी रचाई।

ब्लाई के निधन के बाद MCC को सौंपा गया कलश

कुछ समय बाद ब्लाई इस कलश को अपने साथ लेकर इंग्लैंड लौटे। यह कलश ब्लाई के घर पर करीब 43 साल तक रखा रहा। ब्लाई के निधन के बाद फ्लोरेंस ने यह कलश मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) को सौंप दिया, तभी से यह लॉर्ड्स स्थित एमसीसी संग्रहालय में रखा है।

1990 के दशक में जब ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमों ने वास्तविक ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा करने की इच्छा जताई, तब एमसीसी ने इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (सीए) के साथ विचार-विमर्श के बाद एक कलश के आकार की वाटरफोर्ड क्रिस्टल ट्रॉफी बनवाई।

1998-99 में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीती, तब यह ट्रॉफी पहली बार ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मार्क टेलर को भेंट की गई थी और तभी से एशेज ट्रॉफी ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच प्रत्येक टेस्ट सीरीज के अंत में विजेता कप्तान को दी जाती है।

History behind the ashes series know how this series was named ashes

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Published On: Nov 18, 2025 | 10:52 AM

Topics:  

  • Ashes Series
  • Australia Cricket Team
  • Australia vs England
  • England Cricket Team
  • The Ashes

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