घरेलू पिचों पर हम बार-बार क्यों हारते हैं (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: एक दौर था जब हम अपने स्पिनिंग ट्रैक पर शेर हुआ करते थे, हर टीम को मुकाबला करने के लिए भी लोहे के चने – चबाने पड़ते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। हमारी टीम चार स्थापित स्पिनर्स- रविंद्र जडेजा, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल व वाशिंगटन सुंदर को लेकर मैदान में उतरती है और अनजान ऑफ स्पिनर साइमन हारमर की घुमाव व उछाल लेती गेंदों के सामने नतमस्तक हो जाती है। टीम के कोच गौतम गंभीर कहते हैं कि ‘पिच एकदम वैसी ही थी, जैसा हम चाहते थे और इसमें क्यूरेटर बहुत अधिक मददगार रहा’।
सवाल उठता है जब सब कुछ आपकी मर्जी के मुताबिक हुआ, तो फिर इस शर्मनाक पराजय का दोषी कौन है? गंभीर ने घुमा फिराकर बैटर्स को जिम्मेदार माना है कि उनके पास ऐसे विकेट पर खेलने की तकनीक नहीं थी। लेकिन अगर गौर से देखा जाए तो इसके लिए जिम्मेदार स्वयं गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर हैं, जिनकी वजह से भारतीय क्रिकेट में राजनीति अधिक और खेल कम हो रहा है। टेस्ट मैच स्पेशलिस्ट बैटर्स व स्पेशलिस्ट गेंदबाजों और 1 या 2 ऑल-राउंडर्स की बदौलत जीते जाते हैं। लेकिन गंभीर की मानसिकता टी-20 वाली है, जिसमें ऐसे खिलाड़ियों से काम चल जाता है, जो थोड़ा सा बल्ला तेजी से चला लेते हैं व हाथ घुमाकर 1-2 ओवर भी निकाल देते हैं, बतौर कप्तान व कोच उन्होंने कोलकाता नाईट राइडर्स को 2 आईपीएल खिताब जिताने में मदद इसी ट्रिक से की थी।
सारा ध्यान IPL पर इसी सोच के तहत उन्होंने कोलकाता में द। अफ्रीका के विरुद्ध टीम में मात्र 3 स्पेशलिस्ट बैटर्स यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल व शुभमन गिल (जो चोटिल होने की वजह से मैच में केवल 3 गेंद ही खेल सके) और 2 स्पेशलिस्ट गेंदबाज (बुमराह व सिराज) को लेकर खेले। शेष या तो बोलिंग ऑल-राउंडर्स थे या विकेटकीपर ऑल-राउंडर्स। जाहिर है इन ऑल-राउंडर्स में कोई भी गैरी सोबर्स, कपिल देव या जैक कालिस के स्तर का नहीं है, जो टेस्ट मानकों पर निरंतरता के साथ खरा उतर सके। इसलिए स्पिन लेती पिचों पर हमारा स्तर गिरता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सारा ध्यान आईपीएल पर ही फोकस किया जाएगा तो टेस्ट में स्तर बद से बदतर होता जाएगा। इस समय हमारे पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के तेज गेंदबाज मौजूद हैं, जो किसी भी प्रकार की पिच पर विकेट लेने में सक्षम हैं, तो फिर स्पिनिंग ट्रैक बनाने का मोह किसलिए है? अगर आपके पास इतने जबरदस्त तेज गेंदबाज मौजूद हैं, तो निम्नस्तरीय स्पिनिंग ट्रैक की बजाय स्पोर्टिंग पिच तैयार करनी चाहिए।
ऐसा लगता नहीं कि विराट कोहली व रोहित शर्मा ने टेस्ट से संन्यास अपनी स्वतंत्र मर्जी से लिया था। प्रतीत होता है कि उन पर ऐसा करने के लिए दबाव बनाया गया था कि खुद चले जाओ वर्ना तुम्हें टीम में चुना नहीं जाएगा। जिस तरह से टी-20 विश्व कप व चैंपियंस ट्रॉफी जिताने वाले शर्मा को ऑस्ट्रेलिया के दौरे से पहले वनडे टीम की कप्तानी से हटाया गया और जो गंदा खेल शमी के खिलाफ खेला जा रहा है, उससे इसी धारणा को बल मिलता है। हद तो यह है कि जब कोलकाता टेस्ट चल रहा था तो कमेंटेटर्स लंच के दौरान आईपीएल की टीमों पर ही चर्चा कर रहे थे।
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कोलकाता में वही हुआ, जो मुंबई में 2024 में हुआ था। मुंबई टेस्ट में भारत न्यूजीलैंड के विरुद्ध 147 रन का लक्ष्य हासिल न कर सका था और 25 रन से हार गया था। कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका ने इससे भी कम का टारगेट रखा था, मात्र 124 रन का, लेकिन हमारे बैटर्स उसे भी पार न कर सके और टीम को 30 रनों से शर्मनाक हार का कड़वा घूंट पीना पड़ा। रविवार को भारत की अपने ही घरेलू मैदानों पर दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह लगातार चौथी हार है।
लेख- डॉ. अनिता राठौर