
कितनी मजबूत है हमारी नौसेना की तैयारी (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: दक्षिण एशियाई देशों, ग्लोबल साउथ में नौसेना के नवजागरण की लहर चल रही है।चीन एक बड़ी लहर के तौर पर सामने आ रहा है, उसके पीछे पाकिस्तान और बांग्लादेश भी है लेकिन हमारी खामोश और ठोस तैयारियां भी इनसे पीछे नहीं हैं।ऐसे देशों की नौसेनाएं नवजागरण युग में प्रवेश कर चुकी हैं।दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, ईरान, थाईलैंड आदि भी अपने बेड़े में अत्याधुनिक फ्रिगेट, पनडुब्बी और मल्टी रोल युद्धपोत जोड़ रहे हैं।इससे हिंद महासागर और दक्षिणी समुद्री क्षेत्र की जियो-सामरिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।भारत को दक्षिण एशिया में मुख्यतः चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश की नौसैनिक तैयारियों पर गहरी नजर रखनी ही होगी और उसके मद्देनजर तैयारियां भी करनी होगी।उसे वैश्विक परिदृश्य में नौसैनिक विस्तार को देखते हुए इस क्षेत्र में श्रीलंका, मालदीव वगैरह से भी सतर्क रहना होगा।
पाकिस्तान का जो युद्धपोत 54 साल बाद पहली बार बंगाल की खाड़ी से होता हुआ रक्षा सहयोग को मजबूत करने के मकसद से गुडविल विजिट पर बांग्लादेश पहुंचा था, वह 12 नवंबर को भारत के लिए यह सवाल छोड़ते हुए विदा हो गया कि दोनों देशों के बीच नौसेना के सुदृढ़ीकरण के लिए कोई खिचड़ी क्यों और कैसे पक रही है? चटगांव बंदरगाह, बंगाल की खाड़ी में देश के पूर्वी तट के करीब है।चीन यहां अपना अड्डा बनाना चाहता है।इसलिए पाकिस्तानी और चीनी जहाजों की आवाजाही से भारत की समुद्री सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा।फोर्सेस गोल-2030 के अंतर्गत बांग्लादेश नौसेना नए युद्धपोत खरीदने के अलावा पनडुब्बी, आईएसआर यानी इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉन तथा स्वदेशी निर्माण क्षमताएं बढ़ा रही है।पनडुब्बी और समुद्री विमान संचालन की सुविधाओं में वृद्धि के लिए राबनाबाद में देश का सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा बन रहा है।
बांग्लादेश, पाकिस्तान, चीन तथा तुर्की के बने कई युद्धपोत खरीदने के साथ उनके सहयोग से युद्धपोतों व पनडुब्बियों के 9 वर्षीय आधुनिकीकरण के कार्यक्रम में लगा है।चीन के सहयोग से विकसित उसकी पहली हांगोर-क्लास पनडुब्बी अगले साल उसकी नौसेना में शामिल हो जाएगी और इसकी संख्या 2028 तक 8 पहुंचाने का उसका इरादा है।तुर्की में बना अत्याधुनिक हथियार व स्टील्थ खूबियों से लैस बाबर-क्लास फ्रिगेट इसी साल उसके शामिल होने की खबर है।भारतीय नौसेना पर दबाव बढ़ेगा कि वह भी अपने जहाजों, विमानों और रडार सिस्टम को आधुनिक बनाए।भारत के पास फिलहाल आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं।भारत अगली पीढ़ी के ऐसे युद्धपोत बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें इक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट सिस्टम हो।आज की रफ्तार से अनुमान लगाएं तो उसे लक्ष्य प्राप्ति में कई बरस लगेंगे।
आईएनएस विक्रमादित्य को 2035 में रिटायर्ड किया जा सकता है।हिंद महासागर में सामरिक संतुलन बनाए रखने के लिए तीसरे विमानवाहक पोत की जरूरत है, जिसकी तैयारी तेज है, इसके अलावा दो अन्य युद्धपोत की तैनाती की भी योजना हैं।बांग्लादेश का चीन-सहयोग और नेवल बेस के माध्यम से चीन का विस्तार भारत के लिए चिंता का विषय है, तो पाकिस्तान-चीन गठबंधन, बंगाल की खाड़ी में चीन-बांग्लादेश, समुद्री घुसपैठ तथा अफ्रीका-अरब सागर में चीन की नजर भारत को रणनीतिक रूप से दबाव में लाता है।हमको बंगाल की खाड़ी, अरब सागर एवं हिंद महासागर में मल्टी-डोमेन सतर्कता, निगरानी और नौसैनिक शक्ति प्रदर्शन को बढ़ाना होगा।हमें टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, बीस्पोक शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए रणनीतिक व कूटनीतिक सक्रियता और बढ़ानी होगी।हमें क्षमताओं का विस्तार करने के लिए जहाज, पनडुब्बी, विमान व बेस इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण समयसीमा के भीतर सुनिश्चित करने के साथ समुद्री खुफिया नेटवर्किंग बढ़ाने के साथ मित्र देशों के साथ आधार व अभ्यास बढाना होगा।
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चीन चटगांव में अड्डा बनाने की फिराक में
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान व फ्रांस के साथ साझा नौसैनिक मिशनों और प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों पर साझेदारी करनी होगी।यदि भारत ने समय पर आत्मनिर्भर, स्वदेशी नव-नौसैनिक क्षमताओं को स्थिरता व विस्तार के साथ लागू किया, तो वह भारतीय-महासागर क्षेत्र में अपना नेतृत्व सुनिश्चित कर सकता है.
लेख- संजय श्रीवास्तव के द्वारा






