Navabharat Nishanebaaz: बिना माफी मांगे करते हैं माफ, इस तरह दिखाते अपना रुआब
Forgiveness Political Commentary: व्यंग्य में 'बिन मांगी माफी' के बहाने क्षमा, बड़प्पन और राजनीति पर चुटीला कटाक्ष किया गया है। पड़ोसी और निशानेबाज के संवाद हास्य के साथ कई सवाल भी खड़े करते हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो
Political Forgiveness Satirical Column: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज हम आपको माफ करना चाहते हैं। किसी को माफ करना बड़ी उदारता का काम है। जिसका दिल बड़ा है, वही सामने वाले को उसकी गलती के लिए माफ करता है। अब आप पूरी तरह निश्चिंत हो जाइए, क्योंकि हमने पूरी दरियादिली दिखाते हुए आपको माफ कर दिया।’
हमने कहा, ‘आप कैसी बहकी बहकी बातें कर रहे हैं? जब हमने आपसे माफी नहीं मांगी, कोई क्षमा याचना नहीं की, प्लीज एक्स्क्यूज मी या बेग योर पार्डन नहीं कहा, तो आप हमें माफ करने वाले कौन होते हैं?’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, माफ करना हमारा अधिकार है। हमारा मन हुआ कि आपको क्षमा कर दिया जाए, तो हमने कर दिया। गुनाहों के लिए या तो सजा दी जाती है या एहसान जताते हुए माफ कर दिया जाता है। किसी को माफ करना बड़प्पन की निशानी है। आपने सुना होगा क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात, का रहीम प्रभु को घट्यो जो भृगु मारी लात ! इसलिए छोटे लोग उपद्रव, उत्पात मचाएं या गलती करें तो उन्हें माफ कर देना चाहिए। भृगु ने भगवान विष्णु की छाती पर चरण प्रहार किया था, तो भी भगवान ने उनके पैर को सहलाते हुए कहा था कि मेरे कठोर वक्षस्थल से टकराकर आपके कोमल चरण को चोट तो नहीं आई! क्षमाशीलता एक महान गुण है। इसका इस्तेमाल हम आप पर कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी तो इसी तरह जंतर-मंतर पर आंदोलन का अपराध करने वाले युवाओं को माफ किया।’
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हमने कहा, ‘जेन जी के युवा मानते नहीं कि उन्होंने कोई गलती या अपराध किया। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग करते हुए पेपर लीक का विरोध किया। उन्हें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए था। इसके लिए उन्होंने सरकार विरोधी आंदोलन किया। मोदी के खिलाफ इस्तेमाल भाषा के लिए भी उन्होंने माफी नहीं मांगी। जब वह माफी मांग ही नहीं रहे, तो मोदी जबरदस्ती क्यों उन्हें माफ कर रहे हैं?’
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पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, जैसे भगवान किसी की गलती माफ कर देते हैं वैसी ही महानता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिखाई है। इतने पर भी जेन जी उन्हें थैंक यू नहीं बोल रही है। माफ कर देने की इस शानदार शैली की तारीफ कीजिए। इसे अहंकार मत समझिए। ईसा मसीह ने भी उन्हें कष्ट देने वाले रोमन सैनिकों के लिए कहा था कि हे ईश्वर, इन्हें क्षमा करना। ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
