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नवभारत विशेष: नोबेल पाने के लिए फिर कोशिश कर रहे ट्रंप
Nobel Prize Donald Trump: नोबेल के लिए अब नामांकन का समय आरंभ हो गया है और यह हर हाल में जनवरी के अंत तक पूरा हो जाएगा।खुद ट्रंप ने भारत और उसकी जनता की तारीफ करनी आरंभ कर दी है।
- Written By: दीपिका पाल

नोबेल पाने के लिए फिर कोशिश कर रहे ट्रंप (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: वर्ष 2025 में वह हर प्रकार की कोशिश के बाद भी ट्रंप नोबेल पीस प्राइज नहीं जीत सके थे। इसके पीछे भारत का समर्थन, घोषित तौर पर नहीं मिलना बड़ा कारण रहा। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को भारत ने जिस तरह से सुलटाया था, उसे देखकर ट्रंप ने यह कहकर श्रेय लेने का प्रयास किया कि उन्होंने दोनों की लड़ाई बंद कराई। जबकि इसके विपरीत भारत ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। इससे चिढ़कर ही ट्रंप ने रूसी तेल की आड़ में ‘जजिया कर’ जैसा टैरिफ लगा दिया। अब जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 6 दिसंबर को भारत आ रहे हैं, तो खुद ट्रंप ने भारत और उसकी जनता की तारीफ करनी आरंभ कर दी है।
ट्रंप ने कहा-भारत की जनता उनसे प्यार नहीं करती है, पर जल्दी ही वह उनसे प्यार करने लगेगी। उन्होंने भारत पर लगे टैरिफ को भी घटाने की बात कही। उनका दूसरा बयान है कि उनके देश में हर प्रकार की प्रतिभा नहीं है, इसलिए उन्हें दूसरे देशों से लाना होगा। इसका सीधा सा मतलब है कि अब ट्रंप न सिर्फ टैरिफ कम करने की सोच रहे हैं बल्कि वह एच-1 बी वीजा फीस में जो अनाप-शनाप बढ़ोत्तरी हुई है, उसे भी कम करेंगे। सभी जानते हैं कि भारतीयों जैसी प्रतिभाएं किसी दूसरे देश में नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि अब वह भारतीय यूथ को भी लुभाने के लिए कदम उठाएंगे। ट्रंप के इन निर्णयों के पीछे जो सबसे बड़ी बात है, वह यह है कि वह नोबेल के लिए भारत की अनुशंसा चाहते हैं क्योंकि वह उन्हें मिल नहीं रही। वह जब भी भारत से कोई समझौता करना चाहते हैं तो उनका गुलाम जैसा दोस्त पाकिस्तान, भारत में आतंकवादी हरकतें करवा देता है।
नोबेल के लिए अब नामांकन का समय आरंभ हो गया है और यह हर हाल में जनवरी के अंत तक पूरा हो जाएगा।अब तक ट्रंप को जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची और पाकिस्तान ने नोबेल के लिए नामांकित कर दिया है। धमकियां हर कहीं उत्तेजना का कार्य करती हैं और शांति कभी उत्तेजना से नहीं आती। वह अब भारत की विश्वसनीयता को समझते हुए हमें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार भारत के व्यापार पर अमेरिका की चोट है, यहां की युवा प्रतिभा को अमेरिका ने अपने यहां आने से रोकने की कोशिश की है और अमेरिका भारत को डराने के लिए पाकिस्तान की सहायता कर रहा है। इन हालात में पुतिन की यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। संभवतः खुद ट्रंप भी अगले वर्ष भारत आने की बात करके कोई माहौल पैदा करना चाहते हों। ट्रंप नोबेल प्राइज देने वाली कमेटी को अपनी नेकनीयती और गुडविल दिखाने के लिए केवल भारत को पटाने का प्रयास कर रहे हों, ऐसा भी नहीं है। उन्होंने फीफा को लेकर भी अपनी बात रखी है।
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हां, फीफा की ओर से उन्हें कुछ पॉजीटिव संकेत मिल रहे हैं। इसमें लगता है कि फीफा का पहला शांति पुरस्कार उन्हें मिल सकता है। यह भी संभवतः उन्हीं दिनों में दिया जाएगा, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत में होंगे। वैसे इस बात में कोई दो राय नहीं हैं कि फीफा के प्रेसिडेंट इनफेंटिनो ट्रंप के दोस्त हैं और दोस्त की मदद करने के लिए वह उन्हें यह पुरस्कार दे भी सकते हैं। ट्रंप को लगता है कि अगर उन्हें यह पुरस्कार मिल गया और वह भारत से खराब हुए संबंधों को सुधारते हुए अपने पक्ष में नामांकन पा जाते हैं, तो हो सकता है कि वह वर्ष 2026 का शांति का नोबेल भी पा जाएं। इस बार अमेरिकी शट-डाउन जितना देर तक चला, उतना पहले कभी नहीं चला था। इससे ट्रंप की किरकिरी हुई है।
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जापानी प्रधानमंत्री व पाक का समर्थन मिला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से शांति के नोबेल के लिए तैयारी आरंभ कर दी है। उनके भारत के प्रति बयान, रूसी राष्ट्रपति की तय भारत यात्रा, नोबेल प्राइज के लिए नामांकन का काम आरंभ और फीफा वर्ल्ड कप का शांति के लिए पुरस्कार देने की घोषणा करना, ये कुछ ऐसे घटनाक्रम हैं, जिनसे लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने तय कर लिया है कि वर्ष 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार हर हाल में जीतकर ही रहेंगे। यह लगातार दूसरी बार होगा, जब वह इसके लिए साम-दाम दंड-भेद की नीति अपनाकर खुद को शांति का मसीहा घोषित करना चाहते हैं।
लेख- मनोज वार्ष्णेय के द्वारा
Trump is trying again for the nobel prize
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