
(डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: न जाने कौन फैला रहा है इस तरह की दहशत? देश की प्रत्येक एयरलाइन की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को एक सप्ताह के भीतर बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं। इससे खलबली मचना स्वाभाविक है। किसी एक फ्लाइट को लेकर धमकी देना अलग बात है लेकिन इतनी बड़ी तादाद में धमकी की वजह से बहुत बड़ा फर्क पड़ता है। हवाई यात्रा का टाइमटेबल गड़बड़ा जाता है। कितनी ही फ्लाइट जांच के लिए रोक दी जाती हैं।
यात्रियों को भारी असुविधा होती है। वे समय पर अपने गंतव्य पहुंच नहीं पाते या कनेक्टिंग फ्लाइट मिस कर जाते हैं। इन धमकियों के पीछे कौन है और उसका क्या उद्देश्य है? अनेक एजेंसियां इसका पता लगाने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। सोशल मीडिया और ई-मेल के माध्यम से विमान में धमाका करने की धमकी दी जा रही है।
अनेक डिजीटेक टूल हैं जिनसे पता लगाया जा सकता है कि कौन से शरारती तत्व यह करतूत कर रहे हैं। सोशल मीडिया कंपनियों के पास भी पता लगाने के संसाधन हैं कि कौन से फेक अकाउंट से इस तरह की धमकियां दी जा रही हैं। यह भी संभव है कि इस तरह की धमकी उन देशों से आ रही हो, जिनके साथ भारत का संयुक्त जांच समझौता नहीं है।
आखिर ये कितने शातिर लोग हैं जो इतने दिनों से जांचकर्ताओं की पकड़ में नहीं आए? उड़ान में खलल डालकर उसे रोक देना उनका उद्देश्य मालूम पड़ता है। उनकी धमकी वाकई गंभीर है या खोखली इसका अंदाजा कैसे लगाया जाए? कुछ धमकियां तो ऐसी उड़ान को लेकर थीं जो पूरी हो चुकी थीं। वैसे तो हर उड़ान के पहले विमान और उसके सिस्टम की पूरी तरह जांच की जाती है फिर भी धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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लगभग 25 फ्लाइट्स को इस प्रकार की धमकी मिल चुकी है। एयरलाइंस को स्पष्ट आदेश है कि किसी भी धमकी को बहुत गंभीरता से ले क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस वजह से उड़ान में व्यवधान, विलंब या रद्द होना सामान्य बात है लेकिन ऐसा होने पर हवाई यात्रियों को बुरी तरह हलाकान होना पड़ता है।
ऐसी धमकियां विमानन क्षेत्र की मजबूती की परीक्षा ले रही हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों को ऐसे शरारती तत्वों को यथाशीघ्र खोज निकालना होगा। ऐसा संदेह है कि ये धमकियां यूके और जर्मनी से आ रही हैं। हाल ही में मुंबई पुलिस ने छत्तीसगढ़ के एक नाबालिग को पकड़ा जिसने 3 उड़ानों को लेकर धमकी दी थी।
शायद उसे यह एडवेंचर लगा होगा। इस तरह का अपराध करनेवालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी धमकियां देनेवाले में सिरफिरे, मानसिक रुग्ण के अलावा कोई ऐसा यात्री भी हो सकता है जो उड़ान में विलंब कराना चाहता है। यह भी देखना होगा कि ऐसी धमकी के पीछे कोई एक व्यक्ति है या कोई समूह! कॉल या ई-मेल कहां से आया, इसका तुरंत पता लगाकर शरारती तत्व को पकड़ा जाना चाहिए। साइबर सुरक्षा एजेंसियां ऐसा कर सकती हैं।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा






