नवभारत डिजाइन फोटो
नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, ठंड की वजह से सुबह-सुबह स्नान करने का मन नहीं करता। वैसे तो हमारे बाथरूम में पानी गर्म करने का गीजर है। दरवाजा बंद करने पर ठंडी हवा भी नहीं आती लेकिन फिर भी नहाने के लिए हम हिम्मत नहीं जुटा पाते।
‘ हमने कहा, ‘शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भी गंगा स्नान नहीं कर रहे हैं, इसलिए आपके लिए भी नहाना कंपलसरी नहीं है। डियोडरेंट और फरफ्यूम से काम चला लीजिए और गाते रहिए- जादू तेरी नजर, खुशबू मेरा बदन! ऐसे भी कुछ लोग सप्ताह में एक बार अर्थात जुम्मे के जुम्मे नहाते हैं।
‘ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, शंकराचार्य को यूपी को पुलिस ने गंगा स्नान के लिए रथ से उत्तरकर पैदल जाने को कहा। उनके शिष्यों से भी दुर्व्यवहार किया गया। इसे उन्होंने अपना अपमान माना। न तो उन्होंने माघ माह की अमावस्या को गंगा स्नान किया, न पंचमी को। इस समय शंकराचार्य और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। दोनों पक्षों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं है। स्नान के मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों में राजनीति होने लगी है। स्वामी रामभद्राचार्य ने स्वयं को जगदगुरु बताते हुए योगी का पक्ष लिया है। शंकराचार्य को नकली बताया जा रहा है। खेमेबाजी हो रही है।
‘ हमने कहा, ‘सनातन धर्म में ऐसा विवाद उचित नहीं है। किसी भी पक्ष को अहंकार त्याग देना चाहिए क्योंकि उसकी वजह से क्रोध आता है। गीता के 15वें अध्याय में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं- निर्मान मोहा जित संग दोषा, अध्यात्म नित्वा विनिवृत्त कामा! रामायण के बालकांड में भी कहा गया है- न राग न लोभ न मान-मदा, तिनके सम वैभव वा विपदा! इसलिए मान-अपमान या मद-मोह से संतों को हमेशा दूर रहना चाहिए, यह संसार की माया है। न मान-सम्मान स्थायी है न अपमान। इन स्थितियों में निरपेक्ष व शांत बने रहना चाहिए। कमल के पत्ते पर पानी की बूंद नहीं टिक पाती। ऐसा ही विरागीजनों का आचरण होना चाहिए। संत तुकाराम ने कहा था-निंदकाचे घर असावे शेजारी। आपकी निंदा करने वाले का घर पड़ोस में रहना चाहिए जो आपकी कमी या दोष बताता रहे। संत तुलसीदास ने भी कहा था- निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय। इसका अर्थ है- निंदा करने वाले को पास में रखें। उसके आंगन व कुटिया का भी ध्यान रखें।
यह भी पढ़ें:-मोहम्मद रफी-सुमन कल्याणपुर की जोड़ी का वो दौर, जिसने हिंदी फिल्म संगीत को दिए कई सुपरहिट गाने
‘ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, योगी आदित्यनाथ के पास सत्ता का और शंकराचार्य के पास अपने धार्मिक पद का गर्व है। दोनों का अहं या इगो टकरा रहा है। इसलिए दोनों पीछे नहीं हट रहे हैं। इसी चक्कर में शंकराचार्य का स्नान रुका हुआ हैं।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा