'उनको चाटुकार शंकराचार्य चाहिए', BJP-RSS की छद्म राजनीति पर बरसे अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- अब सबक सिखाने का समय

Shankaracharya Avimukteshwaranand: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने देश में सनातनी राजनीति के उदय की घोषणा करते हुए RSS और BJP पर तीखा प्रहार किया और कहा कि सनातन को नहीं बल्कि छद्म राजनीति को खतरा है।
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नवभारत के संपादक संजय तिवारी से बातचीत करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
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Shankarachrya Avimukteshwaranand: प्रयागराज में नवभारत के संपादक संजय तिवारी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से खास बात की है। इस बातचीत के दौरान आरएसएस और बीजेपी के साथ-साथ सनातन की राजनीति पर खुलकर चर्चा की और कई सवालों के खुलकर जवाब दिया और कहा कि देश में सत्ताधारी दलों में बैठे 'छद्म हिंदुत्व' का प्रतीक बने लोगों को चेतावनी दी और कहा कि सनातनी हिंदुओं को ऐसी राजनीति करने वालों को सबक सिखाने का समय आ गया है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया है कि आजादी के बाद से भारत में वास्तविक सनातनी राजनीति का अभाव रहा है। उनके अनुसार, अब तक देश में अमेरिका की पूंजीवादी राजनीति, सोवियत संघ और चीन जैसी विदेशी विचारधाराओं का बोलबाला था। लेकिन अब समय बदल रहा है। शंकराचार्य ने घोषणा की कि देश में सनातनी राजनीति का बीज बिहार के चुनाव से बोया गया है और अब यह कारवां धीरे-धीरे पूरे देश में अपने अधिकार प्राप्त करेगा। उनका मानना है कि आने वाले दिन केवल सनातनी राजनीति के ही होंगे।

नवभारत के माइक पर RSS की क्लास

शंकराचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि संघ ने कभी भी चार पीठों के असली शंकराचार्यों को अपने मंच पर स्थान नहीं दिया। इसके बजाय, वे 'कार्यकर्ता शंकराचार्यों' या 'फर्जी शंकराचार्यों' से काम चलाते हैं, जो उनके इशारों पर उठते-बैठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर और राम सेतु जैसे आंदोलनों में असली शंकराचार्यों के नाम का फायदा तो लिया गया, लेकिन संघ को हमेशा 'चाटुकार' और विवेकहीन नेतृत्व ही पसंद आया।

छद्म हिंदुत्व को खतरा है: अविमुक्तेश्वरानंद

शंकराचार्य के अनुसार, अब सनातन या शंकराचार्य को कोई खतरा नहीं है, बल्कि खतरा उन दलों को है जो 'सनातन खतरे में है' का नारा देकर हिंदुओं का वोट बटोरते थे। उन्होंने विशेष रूप से भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस जैसी पार्टियों को रिजेक्ट करके भाजपा को इसलिए चुना था क्योंकि उन्होंने हिंदुओं का साथ देने का वादा किया था। लेकिन अब भाजपा की 'कलई' खुल चुकी है। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने के बावजूद गौ रक्षा नहीं की गई और गौ हत्या जारी है, जिससे अब इन 'छद्म हिंदुत्व' वाली ताकतों को अपने अस्तित्व का डर सता रहा है।

हिंदू धर्म में 'खलीफा पद्धति' का विरोध

सवाल के जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हिंदू धर्म की यह विशेषता रही है कि यहाँ धर्माचार्य कभी राजा नहीं बना। राजा शासन करता है और धर्माचार्य उसे भटकने पर सही राह दिखाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान में कुछ नेता खुद को ही धर्मगुरु के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि मुसलमानों की 'खलीफा पद्धति' के समान है। इस पद्धति को हिंदू धर्म से हटाकर पुरातन परंपरा को पुनः स्थापित करना अनिवार्य है।

वोट की कीमत और गौ-हत्या का पाप

देशवासियों को कड़ा संदेश देते हुए शंकराचार्य ने राजनीति में पैसे लेकर वोट देने की संस्कृति पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 1000 या 10,000 रुपये लेकर किसी ऐसी पार्टी को वोट देता है जो सत्ता में आकर गौ-हत्या या भ्रष्टाचार करती है, तो वह मतदाता भी उस पाप का बराबर का भागीदार बनता है। हिंदू धर्म में पाप-पुण्य और नरक-स्वर्ग की अवधारणा को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि गौ-हत्या का पाप इतना बड़ा है कि व्यक्ति लाखों वर्षों तक नरक में सड़ता है।

नए नेतृत्व पर अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब

शंकराचार्य ने जनता से अपील की है कि वे 'रिजेक्टेड माल' यानी पुरानी असफल पार्टियों के पास वापस जाने के बजाय एक नए सनातनी नेतृत्व और नई पार्टी को मौका दें जो स्पष्टता के साथ सनातन धर्म की बात करे। उनका आंदोलन अब गली-गली और गांव-गांव तक पहुंच चुका है और जनता अब इस पर विचार कर रही है कि शंकराचार्य के अपमान के लिए कौन दोषी है। अब समय 'फर्जी शंकराचार्यों' को नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे 'फर्जी हिंदुओं' को उजागर करने का है।

प्रयागराज से नवभारत के सहयोगी संवाददाता राजेश मिश्रा के साथ संपादक संजय तिवारी

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