नवभारत विशेष: शिवसेना, राकां, लोजपा के बाद ‘आप’ को फोड़ डाला, क्या अब पंजाब सरकार भी गिरेगी
BJP Opposition Strategy: सत्ता की राजनीति, ऑपरेशन लोटस और विपक्षी दलों में टूट-फूट को लेकर सवाल तेज हैं। सहयोगियों को कमजोर करने और ‘वॉशिंग मशीन’ राजनीति पर बहस फिर गरमाई।
- Written By: अंकिता पटेल
ऑपरेशन लोटस, राघव चड्डा, केजरीवाल,(प्रतिकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Operation Lotus Political Strategy: देश की राजनीति का एक ही विषय है कि या तो अंदर रहो या बीजेपी के अंडर रहो। अपनी एकछत्र सत्ता और पावर पालिटिक्स की रणनीति के चलते बीजेपी विपक्ष मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए बड़े शातिर तरीके से चालें चलती रही है। वह विपक्ष को निशाना तो बनाती ही है, अपने साथ आए सहयोगी दलों को भी कमजोर व असहाय बनाकर रख देती है।
महाराष्ट्र में आपरेशन लोटस के तहत शिवसेना व राकां की तोड़फोड़ की गई। बिहार में रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा का बंटाडार किया गया। चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति के बीच फूट डलवाकर यह गेम खेला गया।
घर-घर मिट्टी के चूल्हे होते हैं जैसी कहावत को चरितार्थ करते हुए विपक्षी पार्टी के कुनबे के असंतुष्टों पर दबाव डाला जाता रहा कि या तो जांच एजेंसियों का भारी दबाव झेलो और जेल जाने का खतरा मोल लो अथवा इससे बचना है तो सारे आरोपों व दाग-धब्बों को साफ करने वाली बीजेपी रूपी वाशिंग मशीन में चले आओ। बीजेपी किसी से मुरव्वत नहीं करती।
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घर के भेदी राघव चड्डा को पहले ही बीजेपी की ओर से दामाद जैसा ट्रीटमेंट मिल रहा था। केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन जेल गए लेकिन राघव चड्डा ने उनका जरा भी पक्ष नहीं लिया बल्कि बीजेपी के प्रियपात्र बनकर सदन में निहायत औपचारिक व बेतुके प्रश्न पूछते रहे। उनके रंगढंग केजरीवाल भांप गए थे।
आंख के आपरेशन के नाम पर राघव चड्डा कई महीने लंदन में रहे। गाढ़े वक्त पर केजरीवाल या पार्टी के कोई काम नहीं आए। उन्हें अवश्य ही बीजेपी की ओर से संकेत रहा होगा कि सांसदों को अपने साथ फोड़कर लाओ। नियम है कि किसी भी पार्टी के एक तिहाई से अधिक पार्षद पार्टी छोड़कर अपना अलग गुट बना सकते हैं जिसे स्पीकर मान्यता देते हैं फिर वह चाहे जिस पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
उस पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। बुनियाद पर खड़ी आम आदमी पार्टी 14 साल में टूटती बिखरती गई, केजरीवाल के आत्मकेंद्रित स्वभाव की चजह से योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास जैसे कितने ही नेता छिटकते चले गए, अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को सीढ़ी बनाकर सत्ता पानेवाले केजरीवाल झूठ की बुनियाद पर खड़ी पार्टी झूठ और फरेब की अपना कुनबा संभाल नहीं पाए, पार्टी नेता आरोपों में घिरते चले गए, जिन्होंने केजरीवाल की एकाधिकारवाली कार्यशैली व नीयत को भांप लिया, उन्होंने पहले भी उनका साथ छोड़ दिया।
कुछ को आशंका थी कि यह खुद भी डूबेंगे और दूसरे को भी ले डूचेंगे। आदर्शवाद और जनसेवा का चोला पहनकर चलाई गई योजनाओं का लाभ ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया। असीम महत्वाकांक्षा से ग्रस्त केजरीवाल विपक्ष के इंडिया गठबंधन से भी सही तालमेल नहीं कर पाए, अब राघव चड्डा शेर को सव्वाशेर साबित हुए 9 में से 7 सांसदों का चले जाना केजरीवाल के लिए करारा झटका है।
यह जानते थे कि असंतोष पनप रहा है लेकिन आत्ममुग्धता में इतने डूबे रहे कि पैर के नीचे से कालीन खींच लिया गया और वह भौंचक रह गए। समय की पदचाप उन्हें सुनाई नहीं दी।
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बीजेपी ने अपना गेम बड़ी कुशलता से खेला। समझा जा सकता है कि राजनीतिक शतरंज पर आम आदमी पार्टी बाजी बुरी तरह हार गई। झूठ व फरेब की बुनियाद पर बनी पार्टी का यहीं हश्र होना था। बीजेपी ने दिखा दिया कि उसकी कूटनीतिक चाल का कोई जवाब विपक्ष के पास नहीं है।
क्या अब पंजाब सरकार भी गिरेगी
आम आदमी पार्टी को लगे इस सबसे बड़े आघात के बाद बीजेपी का अगला कदम पंजाब की भगवंत मान के नेतृत्व की सरकार को उखाड़ना होगा। राघव चड्डा पंजाब से ही हैं। वहां भी आप विधायकों का गुट टूट सकता है। राजनीति में दबाव और प्रलोभन दोनों के जरिए काम होता है।
-लेख चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
