(डिजाइन फोटो)
Navbharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, जब हम बाहरगांव से लौटे तो हमें यह देखकर बड़ी खुशी हुई कि हमारी कॉलोनी की ओर जाने वाला रास्ता बिल्कुल साफ सुथरा कर दिया गया। रोड डिवाइडर भी काले-पीले रंग से पेंट कर दिए गए। पैचर मशीन से गड्ढे भर दिए गए। हमें ऐसा लगा मानो स्थानीय प्रशासन अचानक हम पर बहुत मेहरबान हो गया। जैसे ही हम कॉलोनी के गेट पर पहुंचे, वहां पुलिस का जमघट नजर आया। उन्होंने हमें तुरंत भीतर जाने से रोक लिया और वापस जाने को कहा।
हमने बार-बार कहा कि हम यहीं रहते हैं। हमें अपने घर जाने दीजिए, पुलिस अधिकारी ने कहा, घर जाकर क्या करेंगे? देख नहीं रहे कि यहां टाइट सिक्योरिटी लगी है। आपने पुरानी फिल्म बॉबी का गीत सुना होगा- अंदर से कोई बाहर ना जा सके, बाहर से कोई अंदर ना आ सके, सोचो अगर ऐसा हो तो क्या हो!
हमने उसे समझाया कि जब हमारा घर यहां है तो क्यों नहीं जाने दे रहे? उसका जवाब था क्या आपको दिखाई नहीं देता कि यहां एम्बुलेंस खड़ी है, बम निर्षक्रय करने वाला विशेष दस्ता तैनात है। स्टेनगन लेकर कमांडो खड़े हैं। ऐसी हालत में आपको घर जाने की सूझ रही है। जाइए कहीं घूम फिरकर शाम तक आइए। घर के प्रति इतना मोह ठीक नहीं है। संत कबीरदास ने कहा था- ना घर तेरा, ना घर मेरा, चिड़िया रैन बसेरा रे! घर को भूलकर किसी होटल में ठहर जाइए और इधर झांककर भी मत देखिए।’
हमने कहा, ‘इस तरह आप क्यों रोक रहे हैं? घर जाना हमारा अधिकार है। वहां हमारा परिवार है। पुलिस अधिकारी ने कहा, अजीब जिद्दी आदमी हैं आप! कितने ही लोगों के पास घर नहीं है। संत तुलसीदास ने कहा था- मांग के खइबो, मशीत में सोइबो। इसका अर्थ है- मांगकर खा लूंगा, मस्जिद में जाकर सो जाऊंगा।’
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हमने कहा, ‘आखिर माजरा क्या है? हमें अपने घर तक क्यों नहीं जाने दे रहे? इस पर पुलिस अधिकारी ने कहा, आपकी कॉलोनी में एक सीनियर बुजुर्ग पत्रकार और लेखक रहते हैं। उनका स्वास्थ्य काफी खराब है इसलिए उन्हें देखने और घर पर ही सम्मानित करने के लिए राजधानी से वीआईपी आए हुए हैं। जब वह वापस चले जाएंगे और बंदोबस्त हट जाएगा तब अपने घर जाना।’
हमने कहा, ‘तब तो आप समझ गए होंगे कि कॉलोनी में वीआईपी आए तो कर्फ्यू लग जाता है। सुरक्षाकर्मी नो एंट्री कर देते हैं।’