नागपुर से करीब 40 km दूर काटोल तालुका के राउलगांव के पास SBL कंपनी में हुआ था विस्फोट (डिजाइन फोटो)
Explosive Factories Not Monitored: पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोजिव सेफ्टी आर्गनाइजेशन (पेसो) के लापरवाह रवैये की वजह से एसबीएल एनर्जी लि। के कलमेश्वर प्लांट में 19 लोगों की भयानक विस्फोट में जान चली गई जिनमें 11 महिलाएं शामिल थीं। विस्फोटक तैयार करनेवाले कारखानों की धांधली और मनमानी की अनदेखी की जाती है जिससे ऐसे भीषण हादसों का खतरा बना रहता है। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करते हुए खेत में मजदूरी करनेवाली गरीब महिलाओं को पैडल से चलनेवाली मशीन से 8 घंटे में 5,000 डेटोनेटर क्रिम (सील) करने का टारगेट दिया जाता रहा। सुपरवाइजरों की धमकी की वजह से महिला कर्मियों को यह जोखिम भरा काम तेजी से करना पड़ता है।
शारीरिक थकान और काम का भारी दबाव ऐसे बड़े धमाके की वजह बनता है। सबसे ज्यादा मौत क्रिमपिंग सेक्शन में हुई जहां आदिवासी व गरीब महिलाओं को बंधुआ मजदूर के समान इस्तेमाल किया जाता है।
नागपुर के आसपास विस्फोटक निर्माण के 11 कारखाने हैं जहां गत 2 वर्षों में 43 मजदूरों की हादसों में मौत हुई है। ऐसी विस्फोटक निर्माता कारखानों में देखरेख की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई जाती है? पेसो आखिर किस मर्ज की दवा है? जिस एसबीएल नामक कंपनी में यह जानलेवा विस्फोट हुआ वहां जाने के लिए ढंग का रास्ता भी नहीं है। कारखाने में एम्बुलेंस तथा अग्निशमन की व्यवस्था भी नहीं है। सीसीटीवी तक नहीं है। कंपनी में सुरक्षा अधिकारी का अस्तित्व नहीं है। ठेके पर रखे गए श्रमिकों को सुरक्षा नियम सिखाए ही नहीं गए।
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पेसो का मुख्यालय नागपुर में है लेकिन इस तरह की अनियमितताओं पर उसका ध्यान क्यों नहीं गया? उसने सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई? विस्फोटक निर्माण एक संवेदनशील उद्योग है जिसमें अप्रशिक्षित ठेके के मजदूरों को रखना नियमों का उल्लंघन है। इस बारे में केंद्र व राज्य सरकार की स्पष्ट व सुविचारित नीति होनी चाहिए, क्या दुर्घटना होने के बाद ही प्रशासन और सरकार को सुरक्षा की जबाबदारी का भान होता है? श्रमिकों को उचित प्रशिक्षण देकर सुरक्षित कार्यस्थितियों में काम कराया जाना चाहिए। मौखिक रूप से सावधानी बरतने की सलाह देना नाकाफी है। उद्योग व निगरानी रखने वाले संस्थान की लापरवाही जानलेवा साबित होती है। इसके लिए संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जाए तभी व्यवस्था दुरुस्त होगी।