हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Restoration Heritage Nagpur: नागपुर जिला न्यायालय परिसर में वाहनों की पार्किंग को लेकर गत कई वर्षों से चली आ रही समस्या को लेकर डीबीए के पूर्व सचिव मनोज साबले की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने ओल्ड हाई कोर्ट की ऐतिहासिक इमारत की जर्जर स्थिति पर गहरा असंतोष और चिंता व्यक्त की।
हाई कोर्ट ने इस मामले में पेश की गई वस्तुस्थिति की रिपोर्ट को चौंकाने वाला करार दिया। अदालत के निर्देश पर डिप्टी रजिस्ट्रार निनाद ए. इंगले ने इस ऐतिहासिक धरोहर स्थल का दौरा किया था।
डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार पिछले लगभग एक साल से वहां जीर्णोद्धार का कोई काम नहीं हुआ और इमारत वर्तमान में अत्यंत जर्जर अवस्था में है। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि तुरंत उचित देखभाल और सुधार कार्य नहीं किया गया, तो इस ऐतिहासिक ढांचे को और अधिक अपूरणीय क्षति हो सकती है।
इस इमारत के ऐतिहासिक महत्व और न्याय के मंदिर के रूप में इसके गौरवशाली इतिहास को देखते हुए हाई कोर्ट ने अब इस कार्य की प्रगति की स्वयं निगरानी करने का फैसला किया है।
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अदालत ने आदेश दिया कि अब से हर सोमवार को इस मामले की सुनवाई होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जीर्णोद्धार का कार्य आगामी 6 महीनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा हो जाए। अदालत ने केंद्र सरकार की वकील को निर्देश दिया कि वे भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से एक हलफनामा दाखिल करें।
इस हलफनामे में विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि वे अगले 6 महीनों में काम पूरा करने के लिए किस तरह आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं और क्या इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कोई बाधा या अड़चन है।