Kamal Haasan ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Kamal Haasan Trump Letter: राष्ट्रीय स्वाभिमान सर्वोपरि है, क्योंकि व्यक्ति से बड़ा समाज और समाज से बड़ा राष्ट्र होता है। फिल्म अभिनेता व तमिलनाडु की एमएनएम पार्टी के नेता कमल हासन ने दृढ़ता से इसी राष्ट्रीय स्वाभिमान को व्यक्त करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को खुला खत लिखा है। इस तरह की सजगता के लिए कमल हासन बधाई के पात्र हैं।
ट्रंप के इस बयान पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई है कि उन्होंने भारत को रूस से तेल लेने की छूट दी है। ट्रंप के इस बड़बोलेपन से नाराज होकर कमल हासन ने एक्स अकाउंट से लिखा कि हम भारत के लोग अपने फैसले खुद लेने वाले आजाद देश के नागरिक हैं और हम किसी दूसरे देश से ऑर्डर नहीं लेते।
कृपया अपने काम से काम रखें। हम आपके देश और वहां के लोगों के लिए शांति व तरक्की की कामना करते हैं। अपने महान राष्ट्र पर गर्व करने वाले करोड़ों भारतवासियों की भावना को कमल हासन ने बेधड़क होकर स्वर दिया है। वास्तव में ऐसा बयान प्रधानमंत्री मोदी की ओर से आना चाहिए था लेकिन संभवतः कूटनीति की वजह से मोदी कभी भी ट्रंप के बेतुके और उल्टे-सीधे दावों का खंडन नहीं करते।
अमेरिका के वित्त मंत्री बेजेंट ने भी दावा किया कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है। इस तरह के अनुमति, छूट, रियायत जैसे शब्द आपत्तिजनक हैं।
भारत को अनुमति देने वाला अमेरिका कौन होता है? वह तय करने वाला कौन है कि भारत किससे तेल खरीदे ? ट्रंप और उनके मंत्री के बयानों से यही ध्वनित होता है मानो अमेरिका दाता है और भारत मूक याचक है।
मोदी सरकार ऐसे बयानों का प्रतिवाद इसलिए नहीं करती क्योंकि वैदेशिक व आर्थिक संबंधों को संभालकर चलना पड़ता है। रूस और चीन जैसे देश भी अमेरिका का खुलकर विरोध नहीं करते।
डोनाल्ड ट्रंप अनगिनत बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध रुकवाया। इसके बाद भी हमारे नेता ट्रंप को झुठा करार नहीं देते। इतना जरूर कहा जाता है कि दोनों देशों के डीजीएमओ (सैन्य कार्रवाई के महानिदेशक) की आपसी चर्चा के बाद ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई स्थगित की गई। सरकार ट्रंप का शेखीखोर स्वभाव जानती है।
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यदि उन्हें झूठा और गलत बताया गया तो वह और टैरिफ बढ़ा देंगे और मन में खुन्नस रखेंगे। इसलिए सरकार व उसके नेता ट्रंप की बयानबाजी को चुनौती देने की बजाय संयम से काम लेते हैं।
ट्रंप खुद को दुनिया का दरोगा मानकर यह दिखाना चाहते हैं कि हर कोई उनकी मर्जी से चलता है। किसी देश की संप्रभुता का सम्मान करना उनके मिजाज में ही नहीं है। कमल हासन ने उन्हें पत्र लिखकर सही सीख दी है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा