यह कीमत बहुत कम...100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चे तेल का दाम, ट्रंप बोले- ईरान को खत्म करते ही कम हो जाएंगे भाव

US-Iran War: मिडिल ईस्ट में तनाव से तेल की कीमतें USD 100 पार कर गई हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान का न्यूक्लियर खतरा खत्म होने पर यह अमेरिका और दुनिया के लिए “छोटी कीमत” है।
Trump on Crude Oil Price Hike
डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trump on Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संभावित संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को लेकर बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अगर इससे ईरान के न्यूक्लियर खतरे को खत्म किया जा सकता है, तो वर्तमान में बढ़ी हुई तेल की कीमतें अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए “छोटी कीमत” हैं।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा कि ईरान की न्यूक्लियर क्षमताओं को खत्म करने के बाद तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि केवल बेवकूफ ही इस स्थिति को अलग नजरिए से देखेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा, “शॉर्ट-टर्म तेल की कीमतें, जो ईरान के न्यूक्लियर खतरे के खत्म होने पर तेजी से गिरेंगी, अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत है। सिर्फ बेवकूफ ही अलग सोचेंगे।”

100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पहुंची कीमत

यह बयान रविवार को आया, जब तेल की कीमतें प्रति बैरल 100 अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गईं। CNN बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब तेल का यह स्तर पार हुआ है। निवेशकों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि ईरान के साथ किसी संभावित संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की सप्लाई लंबी अवधि तक बाधित हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के साथ तनाव की वजह से पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। US ऑयल फ्यूचर्स 18 प्रतिशत बढ़कर लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल हो गए हैं, जो 19 जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊँचा स्तर है। वहीं, ब्रेंट फ्यूचर्स, जो कि वैश्विक तेल का बेंचमार्क माना जाता है, 16 प्रतिशत बढ़कर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।

शेयर बाजार पर भी पड़ा असर

तेल की बढ़ती कीमतों का असर शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ट्रेडर्स यह जोखिम देख रहे हैं कि लंबे समय तक फ्यूल की कीमतों में वृद्धि महंगाई को और बढ़ा सकती है और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है।

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