
कैलाश मानसरोवर (डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: कूटनीति का तकाजा है कि अपनी सुरक्षा व स्वहित को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों से संबंध सुधारे जाएं। यह बात सही है कि चीन विस्तारवादी प्रवृत्ति रखनेवाला ऐसा देश है जिस पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह हमेशा से स्वयं को एशिया का ‘बिग ब्रदर’ मानता आया है।
कोई भारतवासी 1962 के चीनी हमले को नहीं भूल सकता। चाऊ एन लाय ने दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. नेहरू के साथ शांति व सहयोग के पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन चीन ने इसके बाद विश्वासघात करते हुए आक्रमण कर दिया था। इसी तरह पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी पर दोनों देशों के बीच सैनिक टकराव हुआ था जिसमें भारत के 20 तथा चीन के लगभग 100 जवान जान गंवा बैठे थे।
इससे द्विपक्षीय संबंध क्षतिग्रस्त हुए थे। चीन चाहे जैसा हो, उससे तनावरहित संबंध बनाना और साथ ही सीमा विवाद हल का प्रयास जारी रखना भारत के लिए आवश्यक है। पूर्व पीएम अटलबिहारी वाजपेयी ने कहा था कि आप अपना मित्र बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते! 2025 में भारत-चीन डिप्लोमेटिक रिश्तों की 75 वीं वर्षगांठ है।
दोनों देश मानते हैं कि ऐसे अवसर का इस्तेमाल संबंधों में सुधार के लिए होना चाहिए। दोनों देशों के लोगों को एक दूसरे को बेहतर तरीके से जानना भी जरूरी है। बीजिंग में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री और चीन के उप विदेश मंत्री सुन वीडोंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता में कुछ बड़े फैसले हुए। दोनों देश इस वर्ष गर्मियों से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर राजी हो गए हैं।
दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान तथा वीजा को आसान बनाने के मुद्दे पर टेक्निकल अथारिटी मिलकर फ्रेमवर्क तय करेगी। चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कजान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक के बाद वहां हासिल सहमति को बेहद सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
रिश्ते बेहतर बनाने की गति तेज हुई है। 21 अक्टूबर 2024 को सीमा पर गश्त लगाने की व्यवस्था के बाद 18 दिसंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीनी विदेशमंत्री वांग यी की बीजिंग में चर्चा हुई थी। फिर ब्रिक्स देशों के कजान सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जिनपिंग की बैठक हुई थी। चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को संदेह व अलगाव को दूर कर आपसी सम्मान, संवेदनशीलता व परस्पर हितों पर जोर देना होगा।
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दोनों देशों के बीच नदियों की स्थिति व प्रवाह को लेकर ट्रांसबार्डर रिवर डाटा का आदान-प्रदान करने तथा थिंक टैंक व पत्रकारों को वीजा जारी करने पर भी विचार किया गया। इतना सब होने के बावजूद भारत को पूरी सतर्कता बरतते हुए चीन से व्यावहारिक रिश्ते रखने होंगे।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






