निशानेबाज: शुक्ला की शान, अंतरिक्ष अभियान, आगे भारत भेजेगा गगनयान

भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय पायलट शुभांशु शुक्ला 4 दशक बाद अंतरिक्ष की यात्रा करनेवाले दूसरे भारतीय हैं। उनके पहले राकेश शर्मा ने रूस के सोयूज यान से अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
आज का निशानेबाज
आज का निशानेबाज (सौ. डिजाइन फोटो)
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नेशनल डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, पहली बार कोई शुक्ल अंतरिक्ष में गया है वह भी स्पेस स्टेशन में! इसके पहले तक देश के सारे शुक्ला ‘तारे जमीं पर’ बने हुए थे। वैसे यह वर्ष तमाम शुक्लाओं के लिए शुभ है। कवि एवं उपन्यास लेखक विनोदकुमार शुक्ल को कुछ माह पूर्व साहित्यिक उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठा सूचक ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया। हिंदी के मशहूर आलोचक रामचंद्र शुक्ल का नाम हिंदी साहित्य का हर विद्यार्थी और प्रोफेसर जानता है।

व्यंग्य रचनाओं के रसिक पाठकों ने श्रीलाल शुक्ल की कृति ‘राग दरबारी’ अवश्य पढ़ी होगी। राजनीति में दिलचस्पी रखनेवाले जानते हैं कि पहले सीपी एंड बरार और फिर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पं। रविशंकर शुक्ला थे। उनके पुत्र श्यामाचरण शुक्ला भी मध्यप्रदेश के सीएम बने और सबसे छोटे बेटे विद्याचरण शुक्ला इंदिरा गांधी की सरकार में केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री थे। इमरजेंसी के समय उनका अच्छा-खासा दबदबा था।’ हमने कहा, ‘शुक्ल का अर्थ उजला या गौरवर्ण का भी होता है।

गणेश वंदना में कहा गया है- शुक्लांबर धरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजं! भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय पायलट शुभांशु शुक्ला 4 दशक बाद अंतरिक्ष की यात्रा करनेवाले दूसरे भारतीय हैं। उनके पहले राकेश शर्मा ने रूस के सोयूज यान से अंतरिक्ष की यात्रा की थी। वह परिचालन और अंतरिक्ष यान प्रौद्योगिकी में अत्यंत कुशल हैं। उनके साथी हंगरी के टिबोर कापू प्यार से शुक्ला को ‘शक्स’ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि शक्स की बुद्धिमत्ता और उनके पास मौजूदा ज्ञान से पता चलता है कि उनकी उम्र 130 साल हो सकती है।

सोचिए, यह कितनी बड़ी शुभकामना है! देश में जाति जनगणना होनेवाली है। इससे पता चल जाएगा कि राकेश शर्मा हों या शुभांशु शुक्ला दोनों ही पंडित हैं। वैसे पंडित होने में कुछ गलत नहीं है। कुछ वर्ष पहले राहुल गांधी ने भी तो दावा किया था कि वह दत्तात्रेय गोत्र के जनेऊधारी ब्राम्हण हैं। जहां तक शुभांशु शुक्ला की बात है, वह अंतरिक्ष में चिकन नूडल सूप, इंडियन फिश करी के अलावा राजमा-चावल खाएंगे। वह साथ में मिठाई और गाजर का हलवा भी ले गए हैं। शुभांशु को हर किसी की शुभकामना है।’

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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