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नवभारत विशेष: हादसे की राह तकते 216 से ज्यादा जर्जर बांध

India Dam Risk: देश के कई बड़े बांध जर्जर स्थिति में हैं। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित 10 से अधिक राज्यों में सैकड़ों बांध खतरे में हैं, जिससे लाखों लोगों की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Feb 07, 2026 | 07:18 AM

प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )

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Unsafe Dams in India: देश में जो बड़े बांध हैं, उनमें शामिल हैं हीराकुंड, सरदार सरोवर, फरक्का, उरी, इंदिरा गांधी, रणजीत सागर, इडुक्की, भाखड़ा नांगल, पोंग, नागार्जुन, धौलीगंगा, रिहंद, अलमाटी, टिहरी और कोटेशवर आदि। इन बांधों पर देश की अधिसंख्या आबादी सिंचाई और पीने के पानी के लिए निर्भर है, जो बांध बहुत ही नाजुक स्थिति में हैं, उनमें महाराष्ट्र के 50 बांधों के अतिरिक्त मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 24-24, तमिलनाडु में 19, तेलंगाना में 18, उत्तरप्रदेश में 12, झारखंड में 10, केरल में 9, आंध्रप्रदेश में 7, गुजरात में 6 तथा मेघालय में भी 7 बांध हैं। महाराष्ट्र बांधों के मामले में पहले नंबर पर है और उसके बाद मध्यप्रदेश तथा गुजरात हैं।

बांधों की सुरक्षा और उनकी देखरेख मंत्री के बयान के बाद राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। कारण बहुत सीधा सा है। महाराष्ट्र के रत्नागिरि में तिवरे बांध के टूटने से डेढ दर्जन जानें गई, राजस्थान के मलसीसर में बांध टूटने से भी काफी नुकसान हुआ।

गुजरात का मच्छू बांध हादसा कोई शायद ही भूला हो, यहां पर बांध टूटने से दो हजार जानें जाने की सूचना है, तो उत्तराखंड के चमोली में हिमखंड टूटने से हुई बांध दुर्घटना कोई बहुत पुरानी नहीं है।

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यहां पर कम से कम 100 लोगों के बहने की बात थी। जब खुद मंत्री ने स्वीकारा है कि बांधों की तुरंत मरम्मत होनी चाहिए, कब वह जिम्मेदार अफसर जागेंगे जो इन बांधों को समझते हैं या जिन्हें पता है कि इनमें से एक के भी टूटने से कितनी हजार जानें जाएंगी? क्या इनके टूटने के बाद जांच आयोग बताएगा कि यह नुकसान इस वजह से हुआ…? देश के आधे बांध लगभग आधी सदी पुराने हैं और केन्द्र सरकार के विजन-2047 तक ये लगभग उतने पुराने हो जाएंगे कि इनको खतरनाक स्थिति में रखा जायेगा।

जब वर्ष 2019 में लोकसभा में बांध सुरक्षा विधेयक पास हो चुका है। 1986 में भी बांध सुरक्षा की बात लोकसभा में हुई थी। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने 2017 में अपनी रिपोर्ट में कह दिया था कि देश के बड़े बांधों में से सिर्फ 349 बांध ही आपातकालीन कार्ययोजना को पूरा करते हैं? क्या बाकी अभी भी असुरक्षित हैं और अगर हां तो उसका जिम्मेदार कौन है? चूंकि मंत्री की रिपोर्ट प्री-मानसून-2025 की बांध जांच के बाद की है, तो अब तो वर्ष 2026 का मानसून मात्र पांच महीने दूर है, तो क्या इतने समय में सारी व्यवस्था चाक-चौबंद हो जाएगी ? बांध हमें अधिक वर्षा की तत्काल मुसीबत से बचाते हैं और दूसरी यह कि हम पीने का पानी तथा बिजली इन्हीं के दम पर अधिकतर पाते हैं।

जब बांध छलकने लगते हैं तो उनका पानी छोड़ा जाता है और अधिक मात्रा में पानी रिलीज किए जाने से बाढ़ की घटनाएं बताने की जरूरत नहीं है। मच्छू बांध हादसा इसका सीधा उदाहरण है। कोडागगनार बांध जब तमिलनाडु में टूटा था तो कितनी हानि हुई थी यह भी सरकार को पता है। ऐसे उदाहरण हैं जहां मरम्मत के बाद भी घटनाएं हुई, लेकिन अब जब सरकार को पता है तो किस बात का इंतजार है?

महाराष्ट्र के 50 डैम की तुरंत मरम्मत जरूरी

देश के जल शक्ति राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी ने स्वीकार किया है कि देश के 216 बांध गंभीर कमियों से जूझ रहे है। महाराष्ट्र के 50 बांध तुरंत मरम्मत की मांग कर चुके हैं और तेलंगाना का मेडिगड्डा बैराज तथा उत्तर प्रदेश का लोअर खजूरी डैम खतरे की इमरजेंसी स्थिति में हैं, इन दोनों को तुरंत मरम्मत चाहिए, मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों इमरजेंसी खतरे वाले डैमों की अगर तुरंत मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

यह भी पढ़ें:-निशानेबाज: हाईवे हो या फिर माय वे जाम से लोग हलाकान हुए

जब यह जैम हादसे से गुजरेंगे तो कितना पानी बहेगा, इसका अनुमान लगाइये और फिर सोचिए कि कितनी जानें जाएंगी? कितने करोड़ों की संपत्ति मिट्टी में मिल जाएगी? हिन्दुस्तान में आजादी के बाद से बना सबसे पहला बांध भाखड़ा नांगल बांध कहा जाता है। इसका निर्माण 1948 में आरंभ हुआ, वैसे हीराकुंड बांध भी 1947 में बनना आरंभ हुआ था। उसके बाद से बांधों के माध्यम से देश का विकास विभिन्न कार्यों में हुआ।

– लेख मनोज वाष्र्णेय के द्वारा

India vulnerable dams safety crisis infrastructure risk

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Published On: Feb 07, 2026 | 07:18 AM

Topics:  

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  • Maharashtra
  • Navbharat Editorial
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