नवभारत विशेष: हीट वेव इमरजेंसी से जूझ रहा सारा भारत, लू लगने से बचने के उपाय
India Heatwave Emergency: अप्रैल में ही 43-45 डिग्री तापमान ने देशभर में हीट वेव जैसे हालात बना दिए हैं। बढ़ती गर्मी, लंबी अवधि और जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता गहराती जा रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
हीट वेव 2026,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Climate Change Extreme Heat: यह अप्रैल 2026 का आखिरी हफ्ता है, लेकिन गर्मी इस कदर है कि लगता है जैसे आसमान सीधे जमीन पर उतर आया है। दोपहर में सड़कों पर सन्नाटा है, हवा में आग को लपटें हैं और लोगों के चेहरे पर एक ही सवाल, यह गर्मी है या कोई आपातकाल ? राजस्थान और यूपी में सड़कों पर पानी छिड़का जा रहा है। देश के 16 बड़े शहरों में 23 अप्रैल को ही पारा 43 डिग्री के पार पहुंच गया था।
बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के शहरों में इस समय पारा 43 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में तो आसमान से आग बरस रही है। उड़ीसा के झारसुगड़ा में 22 अप्रैल को पारा 44।6 डिग्री पर था, महाराष्ट्र के अकोला में 45 डिग्री तापमान था।
देश के लगभग दो तिहाई से ज्यादा हिस्से में लू चल रही है। देशभर में हीट वेव इमरजेंसी की स्थिति क्यों बन गई है? जो तापमान पहले जून के मध्य में रहता था, वह इस साल अप्रैल में दिख रहा है। न केवल गर्मी बढ़ गई है बल्कि इसकी अवधि भी लंबी हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह क्लाइमेट चेंज का सीधा असर तो है ही, लेकिन मध्य पूर्व में दागी गई सैकड़ों मिसाइलें और बमों की भी गर्मी का इसमें योगदान है।
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अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डि-हाइड्रेशन के मरीज तेजी से बड़े हैं, निर्माण कार्य, दिहाड़ी मजदूर, डिलिवरी देने का काम करने वाले लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई जगहों में स्कूलों का समय बदल दिया गया है। शहरों में कंक्रीट, डामर सड़कें और ऊंची-ऊंची इमारतें दिनभर की गर्मी को सोखकर उसे रात में छोड़ती हैं, जिससे अर्बन हीट आईलैंड के प्रभाव का खतरा पैदा हो गया है। यहां हरियाली की कमी और एसी की गर्म हवा समस्या को और बढ़ा रही है।
गांवों में पेड़ हैं, खुले क्षेत्र हैं। इसलिए वहां अभी राहत है। मतलब साफ है कि शहर विकास की कीमत चुका रहे हैं। ज्यादातर शहरों में अभी से पानी की किल्लत पैदा हो गई है। कई शहरों में टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में भी हैंडपंप सूखने लगे हैं। ज्यादातर शहरों के पास अपना कोई ‘हीट एक्शन प्लान’ नहीं है।
ये सिर्फ पानी के टैंकरों से ही इस गर्मी से निपटने की कोशिश कर रहे हैं, जो संभव नहीं है। इसलिए जरूरी है कि कारगर योजनाएं बनायी जाएं। समाधान, दीर्घकालिक होना चाहिए। जैसे शहरों में ग्रीन कवर बढ़ाना, कूल रूफ और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण करना।
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जल संरक्षण और वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देना तथा काम के समय को सुबह 7 या 8 बजे से शुरु करना तथा दोपहर में लंबी छुट्टी रखना, ये कुछ ऐसे उपाय हैं, जिनके चलते गर्मी से निपटने के कुछ तात्कालिक रास्ते खोजे जा सकते हैं।
लू लगने से बचने के उपाय
दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप में बाहर यानी सड़क पर निकलने से बचें। हर घंटे पानी पीते रहें और संभव हो तो ठंडा पानी न पीएं, सामान्य पानी पीएं जिससे बार-बार व्यास न लगे, हल्के रंग के ढीले-ढाले कपड़े पहनें, अपने साथ हमेशा गमछा, टोपी और छाता रखें, घर में खिडकियां और दरवाजे बंद करके रखें। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें, अगर किसी में चक्कर, उल्टी या तेज बुखार के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
-लेख वीना गौतम के द्वारा
