नवभारत संपादकीय: राज्यसभा चुनाव से NDA को बढ़त? क्या सरकार अब पारित करा पाएगी परिसीमन बिल
NDA Majority Boost: राज्यसभा चुनाव के बाद NDA की संभावित बढ़त को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज। विश्लेषकों का मानना है कि इससे महत्वपूर्ण विधेयकों व भविष्य के परिसीमन संबंधी प्रस्तावों पर असर पड़ सकता है।
- Written By: अंकिता पटेल
राज्यसभा चुनाव, एनडीए, बीजेपी, बहुमत, परिसीमन,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Rajya Sabha Election Impact: इसमें कोई शक नहीं कि 18 जून को होनेवाले राज्यसभा चुनाव में बीजेपी नेतृत्व के एनडीए को मजबूती मिलेगी और वह लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल कर 163 सीटों तक पहुंच जाएगा। इससे मोदी सरकार को संविधान संशोधन बिल पास करने में सुविधा या आसानी हो जाएगी। यद्यपि बीजेपी का 2014 से ही लोकसभा में बहुमत बना हुआ है और 2024 के चुनाव के बाद उसे एनडीए के सहयोगी दलों तेदेपा व जदयू की मदद मिली हुई है।
लेकिन राज्यसभा में उसे विधेयकों को पारित कराने में दिक्कत आती रही है। अब यह स्थिति बदलने के आसार हैं तथा बीजेपी परिसीमन बिल को पास कराने का अपना लक्ष्य पूरा कर पाएगी। यह विधेयक देश का चुनावी भूगोल बदला देगा। जिन क्षेत्रों में बीजेपी का राजनीतिक वर्चस्व है और अधिक तादाद में उसके मतदाता हैं वहां परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इस तरह सारे हिंदी भाषी प्रदेशों में बीजेपी का वर्चस्व और भी प्रबल हो जाएगा और लगातार चुनाव जीतने के उसके लक्ष्य की पूर्ति संभव होगी।
परिसीमन विधेयक पर संख्या बल की चुनौती, सरकार की नजर दो-तिहाई बहुमत पर
दक्षिण के जिन राज्यों की आबादी कम है वहां परिसीमन में अपेक्षित सीटें नहीं बढ़ पाएंगी। इस समय राज्यसभा में बीजेपी की 115 सीटें हैं जबकि उसके एनडीए गठबंधन की कुल 152 सीटें हो जाती हैं। उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 11 सीटें कम पड़ती हैं। बीजेपी अपने रणनीतिक फ्लोर मैनेजमेंट के जरिए सरकार के पक्ष में बहुमत जुटाने का विश्वास रखती है।
सम्बंधित ख़बरें
नवभारत विशेष: भारतीय क्रू वाले जहाजों पर अमेरिकी हमले क्यों? अब तक 7 नाविक मारे गए
Navabharat Nishanebaaz: नेहरू और मोदी में क्यों तुलना, क्या जरूरी है कार्यकाल गिनना
‘छप्पर फाड़ कर मिली जीत’, राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद भोपाल BJP दफ्तर में जश्न; CM मोहन यादव ने कही बड़ी बात
भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का पहला दौरा, साइकिल रैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन का कार्यक्रम
सरकार को पहले लोकसभा में परिसीमन विधेयक पारित कराना होगा। इस वर्ष 17 अप्रैल को विपक्षी इंडिया गठबंधन ने संविधान (131 वां) संशोधन विधेयक का विरोध किया था और वह लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था। यद्यपि विधेयक के पक्ष में 298 वोट तथा विपक्ष में 230 वोट पड़े थे लेकिन सरकार दोतिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी। 54 वोटों से बिल गिर गया था। इसे पास कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी।
संसद में बदले समीकरण, विपक्षी एकजुटता की होगी अग्निपरीक्षा
अब संसद के दोनों सदनों में बदलाव आया है। इस बार सरकार ने यह संविधान संशोधन बिल पेश किया तो डीएमके के 22 सांसद सदन में अनुपस्थित रहकर इसे पारित हो जाने देंगे। इसके अलावा टीएमसी के जिन सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है वे भी सरकार को इस विधेयक को पास कराने में सहयोग दे सकते हैं।
यह भी पढ़ें:-नवभारत विशेष: भारतीय क्रू वाले जहाजों पर अमेरिकी हमले क्यों? अब तक 7 नाविक मारे गए
अब बीजेपी को बीजू जनता दल या वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसे क्षेत्रीय दलों के समर्थन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह न केवल परिसीमन बिल बल्कि अन्य आर्थिक, सामाजिक व न्यायिक सुधार वाले विधेयक भी राज्यसभा में पारित करवा लेगी। अब संसद में इंडिया गठबंधन की एकजुटता की वास्तविक परीक्षा होगी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
