Navabharat Nishanebaaz: नेहरू और मोदी में क्यों तुलना, क्या जरूरी है कार्यकाल गिनना
PM Tenure Debate: प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल को लेकर नेहरू और मोदी की तुलना पर राजनीतिक बहस तेज है। चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि रिकॉर्ड की गणना कुल कार्यकाल से हो या निर्वाचित कार्यकाल से।
- Written By: अंकिता पटेल
(सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Nehru Modi Tenure Comparison: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं। जवाहरलाल नेहरू अपने निधन के 62 वर्ष बाद भी बीजेपी को याद आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो नेहरू की आत्मा कह रही है तुम मुझे यूं भुला न पाओगे! यह तथ्य इस बात से सिद्ध होता है कि बीजेपी नेताओं ने जोर शोर से दावा किया कि नरेंद्र मोदी ने लगातार प्रधानमंत्री पद पर रहने का नेहरू का रिकार्ड तोड़ दिया। इसे वह बहुत बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं जबकि यह आधा सच है। नेहरू 15 अगस्त 1947 से लेकर 27 मई 1964 तक लगभग 17 वर्ष लगातार देश के लोकप्रिय पीएम रहे।’
हमने कहा, ‘आप समझ नहीं रहे हैं। बीजेपी ने 1947 से 1952 तक का नेहरू का कार्यकाल रिजेक्ट कर दिया क्योंकि प्रथम लोकसभा चुनाव 1951 52 में हुए और फिर कांग्रेस पार्टी ने नेहरू को विधिवत प्रधानमंत्री चुना। बीजेपी का आर्गमेंट बड़ा सॉलिड है।’
पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, यदि 1947 से 1952 की नेहरू सरकार को बीजेपी वैध न मानते हुए खारिज करती है तो उस सरकार के मंत्रियों को भी वह अवैध मानेगी। नेहरू की उस सरकार में सरदार पटेल गृहमंत्री, मौलाना आजाद शिक्षा मंत्री, सरदार बलदेव सिंह रक्षा मंत्री, राजकुमारी अमृत कौर स्वास्थ्य मंत्री और डॉ बाबासाहेब आंबेडकर विधि या कानून मंत्री थे। नेहरू की उस गवर्नमेंट में तो डा। श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी शामिल थे जिन्होंने आगे चलकर 1951 में जनसंघ की स्थापना की थी। यही जनसंघ आज की बीजेपी है। क्या इन सारी हस्तियों को बीजेपी नकार सकती है?’
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हमने कहा, ‘बीजेपी का कहना है कि सरदार पटेल को देश की 22 कांग्रेस कमेटियों का समर्थन था लेकिन महात्मा गांधी ने पक्षपात करके सरदार पटेल की बजाय नेहरू को प्रधानमंत्री बना दिया। तब भारत अंग्रेजों का उपनिवेश था और वह अंतरिम सरकार थी। चुनाव के बाद सार्वभौम भारतीय गणतंत्र की सही सरकार बनी।
‘पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, हुज्जत करके क्या फायदा! नेहरू अपनी जगह थे और मोदी अपनी जगह! तुलना हो भी नहीं सकती। नेहरू की पढ़ाई इंग्लैंड के हैरो स्कूल और कैर्मन्ब्रज यूनिवर्सिटी में हुई। वह बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। मोदी के संस्कारों की शिक्षा दीक्षा आरएसएस की शाखा में हुई। नेहरू ने स्टोरी आफ माय लाइफ और डिस्कवरी ऑफ इंडिया लिखी। वह चिंतक और विचारक थे जबकि मोदी संघ के प्रचारक रहे। नेहरू को गुलाब का फूल पसंद था तो मोदी को कमल पसंद है। नेहरू भारतीय लोकतंत्र के शिल्पकार थे। बीजेपी को 2014 में कांग्रेस की पकी पकाई खीर मिल गई। नेहरू इतिहास हैं जबकि मोदी वर्तमान ! दोनों का है अपना योगदान। इसलिए तुलना की जरूरत नहीं।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
