
पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, इंसान कोई गलत काम करे तो उसका मन कचोटता है. उसे न दिन में चैन रहता है, न रात को आराम! चित्रकूट में चोरों के साथ यही हुआ. उन्होंने प्राचीन बालाजी मंदिर से अष्टधातु की 16 मूर्तियां चुराईं लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही महंत के घर के बाहर इन मूर्तियों को छोड़कर चले गए. चोरों ने एक चिट्ठी भी वहां रख दी जिसमें उन्होंने लिखा- ‘हमें रात में डरावने सपने आते हैं इसलिए हम मूर्तियां महंत के घर के बाहर रखकर जा रहे हैं.’’
हमने कहा, ‘‘चोर भी समझ गए कि भगवान से पंगा नहीं लेना चाहिए वर्ना ऊपरवाला छोड़ता नहीं है. मंदिर में देव प्रतिमाओं का अभिषेक, पूजा-अर्चना, नैवेद्य, आरती सब कुछ विधि-विधान से होता था. चोर इन मूर्तियों को ले गए तो उनकी कोई सेवा नहीं की होगी, इसलिए भगवान ने उन्हें डरावने सपने दिखाए. चोरों को आशंका हो गई कि उनका अनिष्ट हो सकता है. या तो पुलिस उन्हें पकड़ लेगी या कोई विपत्ति उन पर टूट पड़ेगी, इसलिए उन्होंने मूर्तियां वापस कर देने में ही अपनी खैरियत समझी.’’
पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, इन प्राचीन मूर्तियों की कीमत करोड़ों रुपए है. चोरों ने चुरा तो लिया लेकिन फिर घबराए होंगे कि इन कीमती मूर्तियों को कहां ले जाकर बेचें? इन देव प्रतिमाओं को गलाने वाला भी कोई नहीं मिलेगा. ईश्वर को मानने वाला कोई व्यक्ति इस तरह का पाप नहीं करेगा. इसके अलावा पुलिस के हत्थे चढ़ जाएंगे तो जेल जाने की नौबत आ जाएगी, इसलिए चोरों ने अपनी गलती सुधार ली.’’
हमने कहा, ‘‘भारत के मंदिरों की प्राचीन प्रतिमाएं चुराने वाले शातिर गिरोह कम नहीं हैं. ऐसी कितनी ही मूर्तियां चुराकर तस्करों ने विदेशियों को बेची हैं और बाहरी देशों के म्यूजियम में इन्हें रखा गया है. जब इंसान मूर्तियों की रक्षा नहीं कर पाता तो भगवान ही डरावने सपने दिखाकर चोरों को सही रास्ते पर लाते हैं. यह प्रभु का चमत्कार है जिसे नमस्कार कीजिए.’’






