नवभारत निशानेबाज: क्या है ‘डेलुलु, सोलुलु व दुलुलु’, जेन जी की भाषा का एक पहलू
Delulu Solulu: जेन-जी ने अपनी अलग शब्दावली बना ली है। डेलुलु, सोलुलु और ट्रुलुलु जैसे शब्द युवाओं की सोच और उम्मीदों को मजेदार अंदाज में बयान करते हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नवभारत डिजाइन फोटो
Navabharat Nishanebaaz: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाली पीढ़ी को जेन जी कहते हैं। इस पीढ़ी ने अपनी एक खास शब्दावलि विकसित की है। ऐसे अजीबोगरीब शब्द किसी शब्दकोश या डिक्शनरी में आपको नहीं मिलेंगे। ये शब्द हैं डेलुलु, सोलुलु और दुलुलु डेलुलु शब्द डिल्यूजन का संक्षिप्त रूप है। इसमें युवा अपने गुंताड़े में रहता है जैसे कि दूसरे दिन परीक्षा होने वाली है लेकिन पढ़ाई आधी-अधूरी हुई है फिर भी वह आराम से बैठकर कहता है कोई फिक्र नहीं, कल का पेपर इजी आएगा।
यही डेलुलु है मतलब भ्रामक उम्मीद या झूठी आशा! जेन जी मानकर चलती है कि डेलुलु ही सोलुलु है। सोलुलु का मतलब है सोल्यूशन या हल। यह मन को समझाने या आत्मविश्वास पक्का करने की बात है कि मैं यह कर सकता हूं। यदि बिना तैयारी के ही सफलता मिल गई और अंदाजी टोला लग गया तो युवा कहता है कि टुलुलु हो गया अर्थात जो सोचा वह सच साबित हुआ। इस तरह यह तीनों शब्द जेन जी की मनस्थितियों को दशति हैं।’
हमने कहा, ‘स्लेंग लैंग्वेज इसे ही कहते हैं यह कैम्पस और चाय टपरी पर चल निकली है। इसके कुछ और नमूने हैं-कान के नीचे बजा दूंगा! ज्यादा बोलबचन मत सुना। ये बता कुछ लोचा है क्या ? मुंबईया भाषा में क्या मांगता का मतलब है कि आपको क्या चाहिए? लोग कहते हैं तेरा डगला (कुर्ता) अच्छा सिएला है? किसी को बातचीत में टोका जाता है कायकू खाली-पीली बोम मारता ! फालतू का लफड़ा नहीं मांगता। ए भाई, तू निकल ले इधर से। किसी परिचित की दुकान पर गए तो वह बोलेगा इनके वास्ते लाला की चाय लाना।
सम्बंधित ख़बरें
1 जुलाई का दिन क्यों खास? आज ही लागू हुआ था ‘वन नेशन, वन टैक्स’
Navabharat Nishanebaaz: बातचीत में जमा ना खर्चा, हो जाए मंदिर पर चर्चा
कॉफी विद मेयर: समीर राजूरकर ने कहा- संभाजीनगर शहर की सकारात्मक पहचान बनाने में डिजिटल माध्यम निभाएं अहम भूमिका
नासिक: मैट ने पलटा पुलिस आयुक्त का फैसला, तीन बर्खास्त पुलिसकर्मी फिर सेवा में बहाल
ऐसी चाय तुरंत आ जाएगी। अगर उसने कहा कि नाना की चाय लाना तो ऐसी चाय कभी नहीं आएगी। यह कोडवर्ड का कमाल है जिसमें पैसा रोकड़ा कहलाता है। लाख और करोड़ को पेटी और खोखा कहते हैं। जिसने मुंबई में बोलचाल का यह तरीका सीख डाला, उसकी लाइफ हो गई झिंगा-लाला !’
यह भी पढ़ें:-भारत के शानदार ग्लास ब्रिज: जानिए ऋषिकेश के बजरंग सेतु से लेकर कन्याकुमारी के ग्लास ब्रिज तक
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
