पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में ‘बिना वेतन के अधिकारी’ बन रहे नगरसेविकाओं के रिश्तेदार, कर्मचारियों में नाराजगी
PCMC Corporators Relatives: पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में महिला नगरसेविकाओं के पति और बेटे प्रशासनिक कामकाज में दखल देते नजर आ रहे हैं। कर्मचारियों ने बिना अधिकार हस्तक्षेप को लेकर नाराजगी जतायी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
PCMC Corporators Relatives Interference: पिंपरी-चिंचवड़ महानगर पालिका के प्रशासनिक गलियारो में इन दिनों एक अलग ही स्थिति देखने को मिल रही है। जनता द्वारा चुनी गई महिला नगरसेविकाओं की जगह उनके पति, बेटे और अन्य पुरुष रिश्तेदार मनपा के कामकाज में दखल देते नजर आ रहे हैं।
बिना किसी आधिकारिक पद और वेतन के ये रिश्तेदार मनपा कार्यालयों मे इस तरह रौब दिखा रहे हैं कि कर्मचारियो के बीच उन्हें ‘बिना वेतन का फुल अधिकारी’ कहा जाने लगा है-अधिकारियों पर दबाव बनाना कर्मचारियों को डांटना और नगरसेविकाओं की कुर्सियों पर बैठकर आदेश देना अब आम बात बन गई है।
प्रशासनिक अनुशासन की उड़ रही धज्जियां
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए मनपा में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है, ताकि महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। हालांकि, वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
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नगरसेविकाओं के पति और बेटे न केवल उनके कार्यालयों का उपयोग कर रहे हैं, बल्कि महत्वपूर्ण बैठकों में बिना अनुमति शामिल होकर प्रशासनिक निर्णयों में हस्तक्षेप भी कर रहे हैं। अधिकारियों के केबिन में बिना अनुमति प्रवेश करना और फाइलों की जानकारी मांगना नियमित प्रक्रिया बन चुकी है।
कई मामलों में अधिकारियों पर विशेष फाइलें मंजूर करने और ठेके दिलाने के लिए दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। राजनीतिक दबाव के कारण अधिकारी और कर्मचारी खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं।
कर्मचारियों पर बढ़ा मानसिक दबाव
इस अनधिकृत हस्तक्षेप का सबसे अधिक असर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और प्यून पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि कई रिश्तेदार केवल अपना प्रभाव दिखाने और ठेकों से जुड़े अवसर तलाशने के लिए कार्यालयों में आते हैं।
उनके कार्यालय में रहने तक चाय, बिस्किट और नाश्ते की लगातार मांग होती रहती है। यदि सेवा में थोड़ी भी देरी हो जाए तो कर्मचारियों को फटकार लगाई जाती है और तबादले की धमकी तक दी जाती है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
निर्वाचित प्रतिनिधियों को मिले वास्तविक अधिकार
महिलाओं को नेतृत्व का अवसर देने के लिए संविधान के अनुसार 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। नीतिगत निर्णय लेने और जनता की सेवा करने का अधिकार केवल निर्वाचित महिला नगरसेविकाओं को ही है। उनके पति या बेटे निजी स्तर पर मार्गदर्शन दे सकते हैं, लेकिन मनपा के आधिकारिक कामकाज और प्रशासनिक बैठको में उनका हस्तक्षेप पूरी तरह अनुचित है। ऐसे हस्तक्षेप से बचना आवश्यक है।
– मुकेश कोलप, नगर सचिव, पिंपरी-चिंचवड मनपा
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बन-मस्का को लेकर मचा हंगामा
हाल ही में पिंपरी-चिंचवड़ मनपा कार्यालय में एक घटना ने कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच काफी चर्चा बटोरी। एक महिला नगरसेविका के बेटे ने समय पर चाय और बन-मस्का नहीं मिलने पर कार्यालय में हंगामा कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने मौजूद प्यून पर ऊंची आवाज में नाराजगी जताते हुए तुरंत नाश्ता लाने का आदेश दिया। इस घटना के बाद कर्मचारियों में अपमान और नाराजगी का माहौल है। कर्मचारियों का सवाल है कि क्या करदाताओं के पैसों से चलने वाली यह संस्था निजी सेवा के लिए इस्तेमाल की जाएगी।
